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धारा 135, 138
आदेश जिसमें पक्षकारों द्वारा साक्षियों को प्रस्तुत किया जाना है, एक विषय है जो सिविल एवं दंड प्रक्रिया संहिताओं द्वारा विनियमित किया जाता है। जबकि परीक्षण के प्रगति क्रम जिसके अधीनस्थ एक साक्षी को किया जाता है, कब प्रस्तुत हो, साक्ष्य अधिनियम द्वारा निर्धारित है।
साक्षियों के प्रस्तुतीकरण का अनुक्रम
सिविल मामलों के वादों में दंड मामलों में
आदेश XVIII नियम 1 सम्मन मामलों में 224 दं.प्र.सं.
अधिपत्र मामलों में 252, 254, 257
संक्षिप्त मामलों में 262
नियम ऐसा प्रतीत होता है।
प्रथम प्रश्न यह निर्धारित होना है कि प्रारंभ करना किसका अधिकार है।
प्रारंभ करने का अधिकार उस पर निर्भर करता है जिस पर प्रमाण का भार है।
परीक्षण का अनुक्रम
- साक्ष्य अधिनियम द्वारा निर्धारित एक साक्षी का परीक्षण गतिक्रम 3 भागों में सम्मिलित है।
धारा 138
(i) मुख्य परीक्षण
(ii) प्रति-परीक्षण
(iii) पुनर्परीक्षण
- पक्षकार जो साक्षी को बुलाता है, के द्वारा साक्षी का मुख्य परीक्षण है।
धारा 137
प्रतिपरीक्षण, प्रतिपक्षी द्वारा साक्षी का परीक्षण है।
पुनप।रीक्षण, वह परीक्षण है जब, प्रतिपक्षी द्वारा उसके प्रतिपरीक्षण के बाद पक्षकार जो उसको बुलाता है के द्वारा साक्षी का परीक्षण किया जाता है।
विचार करने वाले प्रश्न -
- मुख्य परीक्षण एक इच्छा का विषय है। कोई व्यक्ति एक पक्षकार को, साक्षियों को बुलाने के लिए विवश नहीं कर सकता है। किंतु यदि साक्षियों को बुला लिया जाता