376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
सह-प्रतिवादी द्वारा बुलाए गए साक्षी का प्रतिपरीक्षण कर सकता है?
(1) सह-अभियुक्त या सह-प्रतिवादी द्वारा प्रति परीक्षण के विषय में धारा में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।
(2) साक्ष्य अधिनियम प्रतिपक्षी द्वारा बुलाए गए साक्षियों का प्रतिपरीक्षण करने का अधिकार देता है और किसी अन्य को नहीं। फलतः यह अनुगमन करता है कि एक सह-अभियुक्त एक सह-अभियुक्त द्वारा बुलाए गए साक्षी का प्रति परीक्षण केवल तभी कर सकता है जबकि दूसरे का मामला प्रथम के विपरीत है।
21 कलकत्ता 401
(3) इस संबंध में आंग्ल विधि का नियम भिन्न है। आंग्ल विधि के अंतर्गत ‘एक सह-प्रतिवादी या सह-अभियुक्त का’ प्रतिपरीक्षण करना (एक प्रतिवादी और एक अभियुक्त का) अधिकार है, आंग्ल मामलों के अनुसार अप्रतिबंधित है और इस तथ्य पर निर्भर नहीं करता कि अभियुक्त एवं सह-अभियुक्त के वाद प्रतिकूल हैं या कि प्रतिवादी और उसके सह-प्रतिवादी के मध्य एक विवाद्यक है और एक सह-प्रतिवादी एक सह-प्रतिवादी के साक्षी और सह-प्रतिवादी का प्रतिपरीक्षण कर सकेगा यदि वह साक्ष्य देता है।
इस आंग्ल नियम के कारण हैंः-
(i) यह निश्चित है कि एक पक्षकार का साक्ष्य एक अन्य पक्षकार के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में नहीं स्वीकार किया जा सकता है जब तक कि परवर्ती प्रतिपरीक्षण द्व ारा परीक्षण का मौका नहीं पाता।
एलन बनाम एलन, एल.आर.पी.डी. (1894) 248/254
(ii) यह भी निश्चित है कि सभी लिए गए साक्ष्य चाहें मुख्य परीक्षण या प्रतिपरीक्षण में, सभी पक्षकारों के लिए समान रूप से खुले हैं।
लॉर्ड बनाम कालोइन, 3 डियूरी 222
(iii) इसका परिणाम है कि सभी साक्ष्य सामान्य हैं और जो एक अन्य पक्षकार के पक्ष या विरोध में पक्षकार द्वारा दिया गया है, उपयोग किया जा सकता है, परवर्ती को प्रतिपरीक्षण का अधिकार होना चाहिए।
- विधि द्वारा निर्धारित एक साक्षी के परीक्षण के अनुक्रम में एक चूक का क्या प्रभाव होता है?
(1) यह प्रश्न केवल तब उठ सकता है जब प्रतिपरीक्षण या पुनःपरीक्षण में एक चूक है। जब तक मुख्य-परीक्षण नहीं होता है, उस निबंधन के विधिक तात्पर्य में कोई भी साक्ष्य नहीं है।