378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(iii) परीक्षण की सीमाओं से।
एक साक्षी के परीक्षण का क्षेत्र
इस शीर्षक के अंतर्गत हम उन विषयों पर विचार करते हैं, जिन पर एक पक्षकार साक्षी से प्रश्न पूछे जाने के लिए अनुज्ञेय है।
- एक साक्षी के परीक्षण के उद्देश्य मुख्यतः दो हैंः
(i) वह जिसे जानता है उसको उससे प्रकट कराना।
(ii) जो वह कहता है उसकी सत्यता का परीक्षण कराना।
- साक्षी ने जो व्यक्त किया है से परीक्षण का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है केवल यदि, साक्षी का परीक्षण ऐसे प्रश्नों तक बढ़ाया जाता है संबंध रखते हैंः
(i) साक्षी के पुष्टिकरण एवं खंडन से।
(ii) साक्षी के विश्वास या चरित्र के अनुमोदन या दोषारोपण से।
- परीक्षण के क्षेत्र के अंतर्गत हम निम्नलिखित विषयों से संबंधित नियमों के साथ संबंध रखेंगेः-
(i) विषय, जो साक्षियों के परीक्षण के अनुक्रम में प्रकाश में लाए जा सकते या नहीं लाए जा सकते हैं, से संबंधित नियम।
(ii) साक्षी की विश्वसनीयता या अविश्वसनीयता के परीक्षण के लिए नियम।
(iii) साक्षी द्वारा अभिसाक्ष्य में विषयों के पुष्टिकरण या खंडन के संबंध में नियम।
1. एक परीक्षण के अनुक्रम में प्रकाश में लाए जा सकने वाले या नहीं लाए जा सकने वाले विषयः-
- यह प्रश्न 138 एवं 146 धाराओं में वर्णित है। इन धाराओं का प्रभाव है कि दो प्रकार के विषय हैं जो, एक साक्षी के परीक्षण के क्रम में प्रकाश में लाए जा सकते हैं।
(i) विषय जो सुसंगत विवाद्यक है और
(ii) विषय जो साक्षी की विश्वसनीयता से संबंध रखते हैं।
केवल ये दो विषय है जिन पर एक साक्षी को परीक्षित किया जा सकता है।
2. किंतु इन दोनों विषयों पर एक साक्षी का परीक्षण करने के लिए प्रत्येक पक्षकार अधिकृत नहीं है।
- उन विषयों के संबंध में, जो सुसंगत हैं, दोनों पक्षकार अर्थात् पक्षकार जो उसको बुलाता है और प्रतिपक्षी साक्षियों का परीक्षण करने को अधिकृत हैं, वास्तव में वह नियम