380 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
लाता है, उस साक्षी के चरित्र पर अन्य व्यक्ति के साक्ष्य द्वारा दोष नहीं लगा सकता है।
- दोषारोपण निम्नलिखित तरीकों से उपक्रमित किया जा सकता हैः-
(1) उन व्यक्तियों के सक्ष्य द्वारा जो वैयक्तिक ज्ञान से परिसाक्ष्य देते हैं कि साक्षी विश्वासपात्र नहीं है।
(2) प्रमाण द्वारा कि अपना साक्ष्य देने के लिए रिश्वत दी गई है या एक घूस को स्वीकार कर चुका है या अन्य पृष्ठ प्रलोभन प्राप्त कर चुका है।
(3) उसके साक्ष्य के किसी भाग से जिसका खंडन किया जा सकता है के अस्थिर पूर्व कथनों को प्रमाणित करने के द्वारा।
(4) बलात्कार में प्रमाणन द्वारा कि अभियोक्त्री साधारणतः व्यभिचारिणी थी।
3. एक साक्षी के पुष्टीकरण एवं खंडन के संबंध में नियम
एक परिपोषी साक्ष्य की परिभाषा - परिपोषी साक्ष्य का साधारणतः अभिप्राय है साक्ष्य जो एक साक्षी के परिसाक्ष्य की सत्यता को पुष्ट करने का प्रभाव रखता है। वह एक साक्ष्य है जो एक साक्षी को दुगना विश्वस्त होने का आश्वासन देता है।
परिपोषी साक्ष्य के प्रकार - साक्ष्य अधिनियम परिपोषी साक्ष्य के दो वर्गों को मान्यता देता है।
(i) सुसंगत तथ्यों के अलावा तथ्यों का साक्ष्य।
(ii) अतिरिक्त साक्ष्य का।
धारा 156
सुसंगत तथ्यों के अलावा तथ्यों का परिपोषी साक्ष्य दो अपेक्षाएं हैं जो पूर्ण की जानी चाहिए।
(i) परिपोषी परिस्थितियां जिनका साक्ष्य दिया जा रहा है सुसंगत तथ्यों के घटित होने के समय के निकट या समय पर साक्षी द्वारा देखी जानी चिहए।
(ii) न्यायालय की राय होनी चाहिए, कि ऐसी परिस्थितियां यदि प्रमाणित हों तो सुसंगत तथ्यों के संबंध में साक्षी का परिसाक्ष्य परिपुष्ट करेगी।
दृष्टांतः-
अ और ब ने संयुक्त रूप से किसी एक स्थान पर लूट की। ब को दोषारोपित किया जाता है और अ सह-अपराधी उसके विरुद्ध साक्ष्य देता है। अपने साक्ष्य में अ लूट से संबंधित बहुत-सी घटनाओं, जो मार्ग में घटित हुईं, का विवरण देता है।
मार्ग की घटनाओं से संबंधित सह अपराधी के परिसाक्ष्य को प्रमाणित करने के लिए