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अभियोजन स्वतंत्र साक्षियों को बुलाता है।
सुसंगत प्रश्न है, कि क्या ब ने लूट की। अभियोजन द्वारा दिया गया साक्ष्य सुसंगत प्रश्न से संबंधित नहीं है। फिर भी वह एक परिपोषी साक्ष्य के रूप में अनुमत किया जाएगा, यदि न्यायालय की राय यह है कि लूट के संबंध में वह सह-अपराधी के परिसाक्ष्य को परिपोषित करने में सहायता करेगा।
सुसंगत तथ्यों के अतिरिक्त साक्ष्य के माध्यम से परिपोषी साक्ष्य
धारा 157
- यह, साक्षी द्वारा उसी तथ्य से संबंधित किए गए किसी पूर्व-कथन के साक्ष्य द्वारा किया जा सकता है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि वह जो संगत है वह विश्वास करने योग्य है। एक व्यक्ति का एक पूर्ववर्ती अवसर पर किए गए उसी कथन का मात्र तथ्य सत्यता के साथ जरा सा या कुछ भी नहीं जोड़ कर सकेगा। कोई व्यक्ति एक बार बोले गए असत्य से सतत संसक्त रह सकता है यदि उसके लिए कोई अभिप्रेरणा है ताकि यदि संगतता निर्णायक थी तो एक निर्दोष व्यक्ति को जो उसके लिए हानिकर है, दोषसिद्ध करने, उपाप्त करने और दुष्चरित्र व्यक्तियों द्वारा पहले अपराध करने और उसके बाद उस निर्दोष व्यक्ति को आवेष्टित करते हुए विभिन्न व्यक्तियों से विभिन्न समय या स्थानों पर कथन करने से सरलतर कुछ भी नहीं होगा।
आर. बनाम मल्लप्पा 11 बंबई, एच.सी.आर. 196 (198)
- पूर्ववर्ती कथन सशपथ या अन्यथा और या तो साधारण वार्तालाप में या किन्हीं व्यक्तियों के समक्ष जो परिपृच्छा करने एवं व्यक्ति से जिसने उसे किया था, से प्रश्न करने के प्राधिकारी थे से किया गया एक कथन हो सकता है। वह मौखिक या लिखित हो सकता है। एक पूर्ववर्ती कथन, एक व्यक्ति जो परिपृच्छा करने का प्राधिकार रखता है और एक व्यक्ति इस प्रकार प्राधिकृत नहीं है के समक्ष किए गए के बीच एक प्रभेद है। यदि ऐसे व्यक्ति जो विधिकतः तथ्य की जांच करने का परिवाद करने वाला है के समक्ष नहीं किया गया, तब ग्राह्य होने के लिए तथ्य उसी समय घटित या लगभग उसी समय घटित हुआ माना जाना चाहिए। यह प्रतिबंध, जांच करने का प्राधिकार रखने वाले एक व्यक्ति के समक्ष किए गए कथन पर प्रयुक्त नहीं होता है।
25 मद्रास 210
दृष्टांतः-
(i) एक लड़की द्वारा यह आरोपित करने वाला कौन कि उसके साथ बलात्कार किया गया बलात्कार के बाद तुरंत किया, ग्राह्य है।
(ii) एक व्यक्ति के मरणासन्न कथन जिसके जीवित रहने की संभावना है, साक्ष्य