382 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
के एक सम्पुष्टिरूपक अंश के रूप में ग्राह्य है।
(iii) पुलिस को दी गई प्रथम सूचना, सूचना देने वाले का साक्ष्य समर्थक साक्ष्य के रूप में ग्राह्य है।
(iv) समर्थन के रूप में पंचनामा ग्राह्य है।
सावधानी के लिए दो बातें अवश्य कहनी चाहिए।
(1) दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 162 के अंतर्गत जांच के क्रम में पुलिस से किए गए कथन का उपयोग। एक व्यक्ति जो जांच करने को अधिकृत है के समक्ष किए गए ये पूर्वकथन भी हैं।
क्या वे पुष्टिकरण के प्रयोजन के लिए उपयोग किए जा सकते हैं?
एक समय पर यह निर्णीत किया गया था कि वे इस प्रकार उपयोग किए जा सकते हैं।
36 कलकत्ता 281
35 मद्रास 397
39 बंबई 58
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 162 का संशोधन पुलिस के लिखित अभिलेख और मौखिक किए कथन दोनों को अलग करता है। यद्यपि पूर्ववर्ती कथन संपुष्टिकरण के रूप में उपयोग नहीं किए जा सकते हैं।
(2) परिपोषी साक्ष्य और सारभूत साक्ष्य के बीच प्रभेद महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसी पर परिपोषी साक्ष्य का उपयोग निर्भर करता है। परिपोषी साक्ष्य सारभूत साक्ष्य नहीं है।
दृष्टांतः-
एक कैदी के अन्वीक्षण में, उसी अपराध में अभियोजित होने वालों के साथ आरोपित अन्य व्यक्तियों के एक अन्वीक्षण में दिए गए साक्षियों के साक्ष्य उसके विरुद्ध उपयोग किए गए थे। साक्षीगण साधारण रीति से परीक्षित किए जाने के स्थान पर, पुनः शपथित किए गए थे, और कहा फ्इस न्यायालय में मैंने पूर्व में साक्ष्य दिया था और यह साक्ष्य सत्य था।य्
निर्णीत कि यह साक्ष्य अमान्य था। यह केवल एक सहायक साक्ष्य था और केवल जब सारभूत साक्ष्य दिया जाए तो उपयोग किया जा सकता था। यदि सारभूत साक्ष्य नहीं दिया जाता है तो संपोषी साक्ष्य भी नहीं दिया जा सकता है।
12 डब्ल्यू.आर.सी.आर. 3
इसी प्रकार यदि एक पंच, अभियुक्त की शिनाख्त नहीं करता है, शिनाख्त, पंचनामा संपोषी साक्ष्य के रूप में अमान्य हो सकता था।