384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
प्रतिपरीक्षण में एक अन्य साक्षी की अविश्वसनीयता में उसके विश्वास के लिए, एक साक्षी द्वारा कारण दिए जाने वाले उत्तर खंडित किए जाने योग्य नहीं हैं।
इन सब मामलों में, जहां विश्वसनीयता से संबंधित प्रश्नों के एक साक्षी के उत्तर
खंडन के योग्य नहीं हैं, विधि प्रावधान करती है कि यदि उनके उत्तर असत्य हैं तो वे बाद में झूठा साक्ष्य देने के लिए आरोपित किए जा सकते हैं।
- क्या साक्षी के सुसंगत तथ्यों के प्रश्नों के उत्तर खंडन योग्य हैं?
(1) धारा 153 अपने स्वरूप में नकारात्मक है और मात्र उन मामलों को व्यक्त करती है जिनमें खंडन अनुमत नहीं है। यह उन मामलों को व्यक्त नहीं करती जिनमें खंडन अनुमत है।
(2) यह अपने अपवर्जन में सुसंगत प्रश्नों के उत्तरों को शामिल नहीं करती है। निहितार्थ द्वारा ऐसे उत्तरों के खण्डनों को अनुज्ञात करती प्रतीत होती है।
(3) धारा 153 का दृष्टांत (स) है, जो दर्शित करता है कि विधायिका ऐसे उत्तरों के खंडन को शामिल करना अभीप्सित करती थी।
- अतः धारा 153 नियम निर्धारित करती है कि आप सुसंगत प्रश्नों के उत्तरों का
खंडन कर सकते हैं। किंतु आप विश्वसनीयता के प्रश्नों के उत्तरों का खंडन नहीं कर सकते।
सुसंगत तथ्यों पर खंडन
अगला प्रश्न है, क्या ऐसे खंडन पक्षकार के लिए अनुज्ञात हैं, जो साक्षी को बुलाता है, या केवल प्रतिपक्षी पक्षकार के लिए अनुज्ञात हैं?
कि एक पक्षकार, प्रतिपक्षी पक्षकार के लिए बुलाए गए साक्षी द्वारा दिए गए उत्तरों का खंडन कर सकता है, प्रश्न के परे है और सर्वदा ग्राह्य है। उनके द्वारा बचाव साक्षी खंडित किए जाते हैं। एक साक्षी एक पक्षकार के पक्ष में बुलाया जाता है। एक सुसंगत तथ्य पर प्रश्न के उत्तर में वह एक विशेष उत्तर देता है, जिसे वह पक्षकार जिसने उसको बुलाया था असत्य अनुभव करता है। क्या वह पक्षकार जिसने उसको बुलाया था, उसका खंडन करने के लिए एक अन्य साक्षी को बुला सकता है?
उत्तर है कि वह बुला सकता है। विधि उसके अपने साक्षी के चरित्र पर आक्रमण करने द्वारा और यह दर्शित करने के एक विशेष संबंध में कि उसका साक्ष्य असत्य है के मध्य अंतर करने वाली प्रतीत होती है।
एक साक्षी के परीक्षण की पद्धति
- परीक्षण की पद्धति से अभिप्राय है साक्षी से प्रश्न करने का ढंग अर्थात् प्रश्न करने की पद्धति।