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धारा 116
वैयक्तिक उपस्थिति से छूट देने की शक्ति।
धारा 117
सूचना की सत्यता के बारे में जांच
जब व्यक्ति उपस्थित है तो मजिस्ट्रेट सूचना की सत्यता, जिस पर वाद लिया गया है की जांच करने के लिए अग्रसर होगा और ऐसा साक्ष्य लेगा जैसा आवश्यक हो।
यदि धारा 107 के अधीन कार्यवाही की जाती है तो प्रक्रिया सम्मन वाद की होगी।
यदि कार्यवाही धाराओं 108, 109, 110 के अधीन की जाती है तो यह वारंट वाद जैसा होगा सिवाय इसके कि आरोप लगाना आवश्यक नहीं होगा।
जांच लंबित रहते हुए मजिस्ट्रेट यदि समझता है कि अभिलिखित कारणों से तुरन्त कार्यवाही करना आवश्यक है, तो उस व्यक्ति को जांच के समापन के लिए बंधपत्र निष्पादित करने के लिए निदेश करेगा।
धारा 118
यदि ऐसी जांच करने पर यह सिद्ध हो जाता है कि बंधपत्र आवश्यक है तो मजिस्ट्रेट तदनुसार आदेश करेगा।
परन्तु -
आदेश उससे भिन्न नहीं होगा जो उस व्यक्ति को दिया गया था।
प्रत्येक बंधपत्र की धनराशि अत्यधिक नहीं होगी।
यदि वह व्यक्ति अवयस्क है तो बंधपत्र केवल उसके प्रतिभूओं द्वारा निष्पादित किया जाएगा।
धारा 119
यदि यह सिद्ध नहीं किया जाता है कि वह शांति या अच्छा व्यवहार रखने के लिए आवश्यक है तो मजिस्ट्रेट यदि वह अभिरक्षा में है तो उसे मुक्त करेगा या इस आशय की प्रविशिष्ट करते हुए उसे रिहा करेगा।
जिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही की जाती है क्या वह एक अभियुक्त व्यक्ति है?
इस प्रश्न पर मतवैभिन्य है। कुछ वादों में यह माना गया है कि वह अभियुक्त व्यक्ति है।
अन्य वादों में यह माना गया है कि वह अभियुक्त व्यक्ति नहीं है।
बम्बई एल.आर. 27
धाराएं स्वतः स्पष्ट हैं।
इस प्रकार के पदों का जैसे व्यक्ति ऐसे व्यक्ति आदि का सुविचारित प्रयोग और अभियुक्त व्यक्ति, जो सूचित है, व्यक्ति जो कारण दर्शाने के लिए अपेक्षित है अभियुक्त