लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है। - Page 45

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अधिकारिता प्रदान करती है, किन्तु समुद्रों पर नहीं।

19 बम्बई एल.आर. 527

* * * * *

वह क्या है जिसका संज्ञान लिया जाता है?

जिसका न्यायालय संज्ञान लेता है वह अपराध है न कि यह तथ्य कि विशेष व्यक्ति उस अपराध को कारित किए जाने के लिए अभिकथित हैं।

कारणः-

(1) जब कार्यवाहियों के दौरान जिन्हें उपयुक्त रूप से लिए गए संज्ञान से न्यायालय

ने आरंभ किया है यह प्रकट होता है कि वह व्यक्ति उस या उनसे जो जब

संज्ञान लिया गया था अपराधी अभिकथित थे या प्रकट हो रहे थे, से भिन्न

है तब न्यायालय इन नवीन अभियुक्तों को आदेशिक निर्गत कर सकता है

और उनके साथ ठीक वैसे ही व्यवहार कर सकता है जैसे कि वह व्यक्ति

या व्यक्तियों के प्रति आदेशिका निर्गत कर सकता है एवं व्यवहार कर सकता

है जो मूलतः वर्णित थे।

(2) वस्तुतः न्यायालय तब भी संज्ञान ले सकता है जब अपराधी पूर्णतः अज्ञात

है और तब जैसे ही जांच या अन्वेषण दर्शाता है कि ऐसा साक्ष्य व्यक्ति को

अनुवीक्ष्ण पर रखने को न्यायोचित ठहराता है, के बाद यथाशीघ्र आदेशिका

निर्गत कर सकता है।

(3) पुनः यदि मजिस्ट्रेट कोई मामला अंतरण पर प्राप्त करता है जिसका उसने

संज्ञान नहीं लिया है अपने प्राधिकार पर, उन सबके विरुद्ध जिन्हें किसी स्तर

पर साक्ष्य दर्शाता है कि संभवतः अपराधियों के रूप में हो, आदेशिका जारी

कर सकता है।

संज्ञान के लिए वर्जन

  1. धारा 337 - एक इकबाली गवाह।

दंड न्यायालयों की शक्तियां।

इस विषय का उल्लेख तीन विभिन्न शीर्षों के अंतर्गत किया जा सकता है।

(1) अपराध के संज्ञान लेने की शक्ति।

(2) आपराधिक विषय में वादकालीन आदेश पारित करने की शक्ति।

(3) दंड देने की शक्ति।

  1. अपराध के संज्ञान लेने की शक्ति।

क्या कोई न्यायालय अपराध का संज्ञान ले सकता हैः यह निम्न बातों पर निर्भर करता हैः-

(अ) न्यायालय की प्रस्थिति।