29
(ब) अपराधी की राष्ट्रीयता पर।
(स) इस बात पर कि क्या अभियुक्त जज या मजिस्ट्रेट के हाथों न्याय पाएगा।
(अ) न्यायालय की प्रस्थिति।
धारा 6
दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार ब्रिटिश भारत में दंड न्यायालयों की पांच श्रेणियां होंगी।
(i) सत्र न्यायालय
(ii) प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट
(iii) प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
(iv) द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट
(v) तृतीय श्रेणी मजिस्ट्रेट
इसके साथ उच्च न्यायालय अवश्य जोड़ लेना चाहिए।
(i) दंड संहिता के अधीन अपराधों के संबंध में।
धारा 28
- उच्च न्यायालय भारतीय दंड संहिता के अधीन किसी भी अपराध का विचारण
कर सकता है।
- न्यायालय भारतीय दंड संहिता के अधीन किसी भी अपराध का विचारण कर
सकता है।
- किन्तु अन्य मजिस्ट्रेटों के संबंध में वे केवल ऐसे अपराधों का संज्ञान ले सकते
हैं जिन्हें वे दंड प्रक्रिया संहिता की द्वितीय अनुसूची के आठवें स्तंभ में धारित
प्रावधानों (उपबंधों) के द्वारा करने के लिए सशक्त हैं।
धारा 29
(ii) अन्य विधियों के अधीन अपराधों के संबंध में।
(1) यदि विधि न्यायालय को वर्णित करती है तो अन्य कोई भी न्यायालय अपराध का
संज्ञान नहीं ले सकता है।
(2) यदि विधि न्यायालय को वर्णित नहीं करती तब,
(अ) वह उच्च न्यायालय द्वारा विचारित किया जा सकता है या
(ब) वह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की दूसरी अनुसूची के स्तंभ (कालम) आठ
के अंतर्गत शीर्षक फ्अन्य विधियों के विरुद्ध अपराधय् में वर्णित न्यायालय
द्वारा विचारित किया जा सकता है।
धारा 29-अ
(ब) अपराधी की राष्ट्रीयता
यदि अपराधी एक यूरोपीय ब्रिटिश जन है तो मजिस्ट्रेट द्वितीय या तृतीय श्रेणी रु.