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III. दंड की शक्तियां
भारतीय दंड संहिता की धारा 53 द्वारा निर्धारित अपराध के लिए दंड निम्नलिखित हैः- I. मृत्यु
(अ) जो धारा 121, 132, 194, 302, 305, 307, 396 में दी जा सकती है। (ब) जो निश्चित धारा 303 (एक आजीवन अपराधी द्वारा कारित हत्या) में दी जा सकती है।
II. निर्वासन - कालापानी
(i) आजीवन
(अ) जो धारा 75, 125, 128 में दिया जा सकता है।
(ब) जो धारा 226, 311 में निश्चित रूप से दिया जाना चाहिए। (ii) किसी भी अवधि के लिए -
(अ) जो धारा 121-अ, 124-अ में दिया जा सकता है।
(ब) धारा 59 के अन्तर्गत जो सात साल से कम एवं उस अवधि से ज्यादा नहीं
है, जिसके लिए अपराधी को कारावास हो सकता था, दिया जा सकता है। III. दांडिक अधिसेविता
जो तब दिया जाए, जब कोई यूरोपीय या अमरीकी निर्वासन के दंडनीय अपराध के लिए सिद्ध दोष हो। धारा 59
कारावास
जो 14 वर्षों से अनाधिक किसी भी अवधि के लिए हो सकता है।
वह सादा हो सकता है, या
वह कठोर हो सकता है।
1921 के अधिनियम सं. 16 की धारा 4 द्वारा निरसित
- (i) समग्र संपत्ति का समपहरण
(अ) जो धारा 62 में किया जा सकता है।
(ब) जो धारा 121, 122 में किया जा सकता है।
(ii) विशिष्ट संपत्ति का समपहरण
(अ) जो धारा 126, 127 में किया जा सकता है।
(ब) जो धारा 169 में अवश्य किया जाना चाहिए।
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