पुनरीक्षण अधिकारिता
सिविल प्रक्रिया संहिता
धारा 115
उच्च न्यायालय ऐसे उच्च न्यायालय के अधीन किसी न्यायालय से किसी भी मामले का अभिलेख मंगवा सकता है और जिसमें उसके संबंध में कोई अपील नहीं हो सकती और यदि अधीनस्थ न्यायालय प्रकट होता है-
अ) विधि द्वारा अनिविष्ट न्यायाधिक्षेत्र का निष्पादन करने वाला है, अथवा
ब) इस प्रकार निविष्ट एक न्यायाधिक्षेत्र के निष्पादन करने में असफल रहने वाला है, अथवा
स) अपने न्यायाधिक्षेत्र में अवैधतः या भौतिक अनियमिततः कार्य करने वाला है, उच्च न्यायालय, ‘वाद’ में ऐसा आदेश कर सकता है, यदि वह उपयुक्त समझे।
दंड प्रक्रिया संहिता
धारा 435 1) उच्च न्यायालय या कोई सत्र न्यायालय या जनपद मजिस्ट्रेट या कोई परगना मजिस्ट्रेट में प्रांतीय सरकार द्वारा अधिकृत, किसी अवर दंड न्यायालय में अपने न्यायाधिक्षेत्र की स्थानीय सीमाओं में स्थित रहकर किसी प्रक्रिया के अभिलेख को मंगवा सकता है, अपने किसी प्रयोजन की शुद्धता या प्राथमिकता के उद्देश्य हेतु किसी निष्कर्ष के किसी दंडादेश का निष्पादन निलंबित हो और यदि अभियुक्त बंदीगृह (हवालात) में है कि वह अभिलेख के परीक्षण के लंबित होने के क्रम में प्रतिभूति पर रिहा किया जाए या उसके अपने मुचलके पर रिहा किया जाए।