पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 55

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

सिविल प्रक्रिया संहिता

दंड प्रक्रिया संहिता उपबंधित कि कोई भी न्यायालय इस धारा के अधीन किसी ऐसे व्यक्ति के वाद में जो विमुक्त कर दिया गया है, के लिए कोई निर्देशन नहीं देगा, जब तक कि ऐसे व्यक्ति को अवसर न मिला हो, यह कारण दर्शाने का कि ऐसा निर्देशन क्यों नहीं देना चाहिए।

धारा 437 जब धारा 435 या अन्यथा के अधीन किसी वाद के अभिलेख को परीक्षित करते समय सत्र न्यायाधीश या जनपद मजिस्ट्रेट विचारित करता है ऐसा वाद अनन्य रूप में सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है और कि एक अभियुक्त व्यक्ति अनुपयुक्ततः एक अवसर न्यायालय द्वारा विमुक्त कर दिया गया है, सत्र न्यायाधीश या जनपद मजिस्ट्रेट उसे गिरफतार करा सकता है और उस पर एक नवीन परिपृच्छा के लिए निर्देशित करने के स्थान पर उसको अन्वीक्षण के लिए उपार्जित करने के आदेश कर सकता है, उस विषय पर जिसके लिए वह सेशन न्यायाधीश या जिला मजिस्ट्रेट की राय में अनुपयुक्त ढंग से विमुक्त किया गया है।

निम्नवत् उपबंधितः-

(अ) कि अभियुक्त को ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को कारण दर्शाने का एक अवसर न मिला हो कि सुपुर्दगी क्यों नहीं की जानी चाहिए।

(ब) कि यदि ऐसा न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट सोचता है कि साक्ष्य दर्शाता है कि कोई अन्य अपराध अभियुक्त द्वारा किया जा चुका है ऐसा न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट ऐसे अपराध में परिपृच्छा करने के लिए अवर न्यायाधीश को निर्देशित कर सकता है।