46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
सिविल प्रक्रिया संहिता दंड प्रक्रिया संहिता
धारा 109
ब्रिटिश भारत के न्यायालयों से अपीलों के संबंध में परिषद में महामहिम द्वारा समय-समय पर बनाए गए नियमों के अधीन और उसके बाद धारित प्रावधानों के प्रति परिषद में महामहिम के लिए अपील स्वीकार्य होगी -
(अ) एक उच्च न्यायालय या अंतिम अपीलीय क्षेत्राधिकार के किसी अन्य न्यायालय द्वारा एक अपील पर पारित किसी डिक्री या अंतिम आदेश के प्रति_
(ब) मौलिक सिविल क्षेत्राधिकार के निष्पादन में एक उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतिम आदेश के प्रति_ और
(स) किसी डिक्री का अंतिम आदेश जब वाद, जैसा कि उसके बाद प्रावधानित परिषद में महामहिम के लिए अपील के लिए उपयुक्त वाद होना प्रमाणित किया जाता है।
धारा 110
धारा 109 के उपखंड (अ) एवं (ब) में वर्णित वादों के हरेक में वाद विषयक धनराशि प्रथमतः निश्चित रूप से दस हजार रुपए या उससे अधिक होनी चाहिए और परिषद में महामहिम को अपील में धनराशि संविषयक विवाद पर निश्चित रूप से वही या अधिक होना चाहिए।
अथवा डिक्री या अंतिम आदेश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, कोई दावा या प्रश्न या समान मूल्य की संपत्ति के संबंध रखने
और जहां डिक्री या अंतिम आदेश, की गई अपील से न्यायालय अपने से निम्न
को अन्वेषित करता है_ या कोई अन्य आधार, जो अपीलीय न्यायालय में अपील के लिए पर्याप्त आधार का होना प्रकट करता है_ और
(स) जब तक कि दंडादेश विधि द्वारा नियत नहीं है, पारित आदेश के विरुद्ध अपीलीय न्यायालय की अनुमति के साथ। (2) धारा 417 में धारित किसी बात के होते हुए भी प्रांतीय सरकार लोक अभियोजक को उच्च न्यायालय द्वारा उसके मौलिक क्षेत्राधिकार के निष्पादन में पारित उन्मोचन के आदेश के प्रति उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए निर्देशित कर सकती है और ऐसी अपील धारा 418, या धारा 423, उपधारा (2) या किसी उच्च न्यायालय के अधिकार में धारित किसी विषय के होते हुए भी, किन्तु इस धारा की उपधारा (1) के उपबंध (ब) और (स) द्वारा आरोपित प्रतिरोधों के अधीन अभिशंसा के विरुद्ध एक अपील तथ्यपरक विषय के साथ-साथ विधिक विषय पर भी स्वीकार्य होगी।
(3) किसी अधिनियम या नियमन में धारित अन्यत्र किसी बात के होते हुए भी इस धारा के अधीन एक अपील कम से कम दो न्यायाधीशों से बने उच्च न्यायालय द्वारा सुनी जाएगी, जिनके द्व ारा मौलिक अन्वीक्षण किया गया था, से अन्य न्यायाधीशों से और यदि ऐसे प्रभागीय न्यायालय अव्यावहारिक हैं, उच्च न्यायालय प्रांतीय सरकार को प्रतिवेदित करेगा, जो धारा 527 के अधीन अपील को एक अन्य