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किए तो बोर्ड उनको निष्पादित करेगा।
व्यय को वसूल करने की दो विधाएं थीं जो अधिनियम द्वारा निर्धारित की गई थीं। एक विधा धारा 213 के द्वारा थी और दूसरी धारा 240 के द्वारा थी। धारा 213 ने बोर्ड को अनुमत किया वसूल करने को बोर्ड द्वारा स्थानीय दर से लगाए गए चन्दे सहित वसूलने के लिए अनुमति दी। और धारा 240 ने उनको स्वतंत्रतः एकमुश्त वसूल करना अनुमत किया। गॉल्ड को दिए गए नोटिस में यह व्यक्त किया गया था कि वसूली धारा 213 के अंतर्गत होगी। किन्तु एक वाद में बोर्ड ने धारा 240 के प्रावधान के रूप में वसूल करना चाहा। बोर्ड विबंधित किया गया। यह अनभिज्ञ दुर्निरूपण का मामला था।
(2) निरूपण मौखिक हो सकता है या चुप रहने से हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में चुप रहना भावपूर्ण हो सकता है और एक निरूपण बोले गए शब्दों द्वारा किए गए बिल्कुल ठीक और वास्तविक जैसा हो सकता है।
किन्तु चुप्पी का प्रत्येक मामला बोलने के समान नहीं लिया जा सकता क्योंकि विधि एक व्यक्ति से, प्रत्येक अवसर पर जो उसके मन में है, को बोलने की आशा नहीं करती। विधि एक व्यक्ति से केवल जब उस पर बोलने और अपने मन को उजागर करने का कर्त्तव्य है, बोलने की अपेक्षा करती है। अन्यथा शांति स्वर्णिम है।
अतः शान्त रहने से, एक विबंधन को उठाने पर बोलने के दायित्व को अपेक्षा करनी चाहिए। मौन के प्रभाव पर विचार करने में यह देखना होता है कि क्या वहां बोलने के लिए कोई अवसर था और मौन रहने के लिए युक्तियुक्त अवसर था। अनुमान के लिए एक न्यायसंगत आधार के रूप में मौन पर विश्वास करने से पूर्व यह अवश्य करना चाहिए।
(1896) ए.सी. 231 (238)
2 बी.आर. सी.सी. 400 (419)
6 बम्बई एल.आर.
दृष्टांत - (1) विबंधन के लिए मौन आधार नहीं।
10 बम्बई एल.आर. 297
एक निर्णीत ऋणदाता ने पिता के विरुद्ध एक डिक्री प्राप्त कर ली थी। निष्पादन में सम्पत्ति कलेक्टर द्वारा व्यवस्थित की गई और उसकी आय ऋणदाता को भेजी गई। जबकि यह सब चल रहा था पिता की मृत्यु हो गई और पुत्र सम्पत्ति का उत्तराधिकारी हो गया। संयुक्त ऋणदाता ने पुत्र के विरुद्ध, जिसने प्रतिवाद किया था कि वह उत्तरदायी नहीं है, चूंकि ऋण अनुपयुक्त थे, डिक्री के निष्पादन के लिए न्याय देखा यह विवाद किया गया कि पुत्र विबंधित था क्योंकि उसका मौन निरूपण था कि उसने डिक्री स्वीकार कर ली थी। निर्णीत हुआ यह इसलिए नहीं था क्योंकि कोई कर्त्तव्य नहीं था।