52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
दृष्टांत-(2) विबंधन के लिए मौन आधार।
15 आई.ए. 171
निष्पादन की कार्यवाही में, न्यायालय द्वारा विक्रय में, एक मुनादी द्वारा जिसमें निर्णीत - ऋणी के अधिकार अपूर्णतः वर्णित किए गए थे। परिणाम है कि 40,000 रु. कीमत की सम्पत्ति 20,000 रु. में बेच दी गई। संयुक्त ऋणी द्वारा विक्रय को निरस्त करने के लिए एक वादा लाया गया। विवाद था कि मौन विबंधन था निर्णीत हुआ, वह था चूंकि आगे आना और घोषणा को सही करा लेना कर्त्तव्य था।
आचरण द्वारा निरूपण हो सकता है।
- आचरण निरूपण के समान हो सकता है या यह नहीं हो सकता है -
(i) जहां यह निरूपण के समान होता है। 19 आई.ए. 203
(ii) जहां यह नहीं होता है। 19 आई.ए. 221
- आचरण या तो कर्मण्य या अकर्मण्य हैं।
अकर्मण्य आचरण दोनों है
(i) उदासीनता।
(ii) मौन सम्मति।
अकर्मण्य आचरण एक विबंधन प्रस्तुत करने के लिए मौन सम्मति के समान होना चाहिए। यह उदासीनता का आचरण मात्र नहीं होना चाहिए।
मौन सम्मति का आचरण निम्नानुसार वर्णित किया जा सकता हैः-
फ्यदि एक व्यक्ति का एक अधिकार है और दूसरे व्यक्ति को उस अधिकार पर अतिक्रमण का एक अधिकार है और एक अन्य व्यक्ति को क्रम में देखते हुए, ऐसे एक ढंग से जैसे उस कार्य को किए जाने के लिए एक व्यक्ति को वस्तुतः प्रेरित करते, चुपचाप देखता रहता है, और जो अन्यथा उससे अलहदा हो सकता था, विश्वास करने कि वह उसके किए जाने का समर्थन करता है, एक आचरण है जो मौन सम्मति के आचरण के समान होता है।य्
2 बी.एच. 117 (123) 41 ई.आर. 886
इम्प 45 बम्बई आई.एल.आर. 80
14 इलाहाबाद 362 (364)
मौन सम्मति, जबकि मौन सम्मत कार्य प्रगति में है, घटित हो सकती है, या यह केवल तब जब कार्य सम्पन्न हो जाता है, के बाद घटित हो सकती है।
विबंधन के प्रयोजन के लिए यह जब अतिक्रमण प्रगति में है, घटित होनी चाहिए।