पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 73

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

विरुद्ध वह सत्य से इंकार कर सकता है।

5 डब्ल्यू.आर. 209

5 ए.आर. 209

वादी ने आरोप लगाया कि उसने विवादित सम्पत्ति को 10,000/- रु. में खरीदा था। धन के लिए दबाव पड़ा तो बाद में उसने अपनी मां के नाम गिरवी रख दिया। उसने एक वर्ष बाद गिरवी रखी सम्पत्ति को छुड़ा लिया और सम्पत्ति पर कब्जा कर लिया।

प्रतिवादी ने वादी की मां के विरुद्ध डिक्री प्राप्त की और डिक्री के निष्पादन और संतुष्टि के लिए सम्पत्ति को कोर्ट के क्रय-विक्रय विभाग द्वारा बेच दिया और उसे बेनामी करके वादी को बेदखल कर दिया। वादी ने सम्पत्ति को फिर से प्राप्त करने के लिए मुकदमा खड़ा किया।

प्रतिवादी ने प्रतिवाद किया कि वादी विबंधित था यह सिद्ध करने के लिए कि वह स्वामी था क्योंकि वादी ने पहले मुकदमे में स्वीकार किया था कि उसकी मां मालिक थी क्योंकि उस मामले में प्रतिवादी एक पक्ष नहीं था। निर्णीत हुआ वहां विबंधन नहीं था।

विबंधन और निर्णायक प्रमाण के बीच अंतर

  1. विबंधन, उस पक्ष द्वारा जिसके पक्ष में वह लागू होता है, के द्वारा छोड़ा जा सकता है। किन्तु निर्णायक प्रमाण त्यागा नहीं जा सकता।

विबंधन और पूर्व निर्णयत्व के मध्य अंतर

पूर्व निर्णयत्व एक व्यक्ति को उसी बात को दूसरे मामलों में दोबारा प्रमाणित करने से रोकता है।

विबंधन एक व्यक्ति को एक समय पर एक बात कहने और उसके विपरीत दूसरे समय पर कहने से रोकता है।

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विबंधन की भारतीय और आंग्ल विधि।

  1. आंग्ल विधि के अंतर्गत विबंधन साधारणतः तीन शीर्षकों में वर्गीकृत किए जाते हैं।

(i) अभिलेख द्वारा विबंधन।

(ii) प्रलेख द्वारा विबंधन।

(iii) आचरण द्वारा विबंधन।

  1. अभिलेख द्वारा विबंधन का अभिप्राय है एक समक्ष न्यायालय के निर्णय द्वारा विबन्धन।

(i) अभिलेख द्वारा विबंधन भारतीय विधि द्वारा स्वीकारा जाता है। यह इनको प्रयोग में ले जाते हैं -

(अ) सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा। धारा 11-4