58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(i) धारा 115 के अंतर्गत विबंधन किन्हीं दो पक्षों के बीच पैदा हो सकते
हैं। यह आवश्यक नहीं है कि वे एक विशेष विधिक दायित्व से
संबंधित होने चाहिए। धारा 116-117 के अंतर्गत विबंधन केवल उन
पक्षों के बीच पैदा होते हैं, जो एक विशेष संबंध से संबंधित हैं।
(ii) धारा 115 के अंतर्गत विबंधन एक पक्ष द्वारा दूसरे के प्रति तथ्यों के
दुर्निरूपण के कारण उद्भूत हो सकता है। धारा 116-117 के अंतर्गत
विबंधन पक्षों के बीच समझौते के कारण पैदा होते हैं, जिन्होंने अपने
मध्य एक विशेष जालसाज़ी पूर्ण संबंध बना लिया है।
धारा 116 निम्न विबंधनों के मध्य कार्य करती है।
(i) भूमि-स्वामी एवं किराएदार_ और
(ii) लाइसेंसधारी एवं अचल सम्पत्ति के लाइसेंसदाता के मध्य।
(i) भूस्वामी और किराएदार
यह विबंधन अचल सम्पत्ति के पट्टठ्ठेदार के प्रति लागू होता है।
यह विबंधन पट्टठ्ठेदार के माध्यम से दावा करने वाले के प्रति भी लागू होता है। दूसरे
शब्दों में, यदि एक किराएदार अपनी सम्पत्ति को, भूस्वामी के ज्ञान या अनुमति
के बिना शिकमी कर देता है, शिकमी भी यह अस्वीकार करने से विबंधित होगा
कि भूस्वामी प्रारम्भ में इसका अधिकारी था।
- यह विबंधन भूस्वामी बनने का दावा करने वाले एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाना
सुनिश्चित नहीं करता।
ऐसे दो सम्भव मामले हैं जिनमें परिसर किराए पर दिया जा सकता हैः
(i) जहां वादी ने प्रतिवादी को किराए पर भूमि का कब्जा दिया है।
(ii) जब वादी स्वयं वह व्यक्ति नहीं है जिसने प्रतिवादी को किराए पर कब्जा दिया वरन् जिसने कब्जा दिया उस व्यक्ति से प्राप्त एक सत्वाधिकार के अंतर्गत है।
यह धारा प्रथम मुकदमे में प्रयुक्त होती है और किराएदार को भूस्वामी के सत्वाधिकार को अस्वीकार करने से विबंधित करती है। द्वितीय मुकदमे में यह लागू नहीं होती है जहां सत्वाधिकार भूस्वामी से प्राप्त किया जाता है, अर्थात् विक्रय, पट्टठ्ठा या उत्तराधिकार द्वारा, ताकि जब वादी प्राप्त सत्वाधिकार से दावा करता है, तो प्रतिवादी यह दर्शाने से विबंधित नहीं किया जाता है, कि सत्वाधिकार वादी में नहीं वरन् किसी अन्य व्यक्ति का है। किराएदार बता सकता है कि उसने सत्वाधिकार प्राप्त नहीं किया है। यह इन शब्दों की ‘भूस्वामी के द्वारा दावा करते हुए’ की अनुपस्थिति का प्रभाव है।
यह विबंधन किराएदारी के प्रारंभ में सत्वाधिकार के अस्वीकरण पर प्रयुक्त होता है, ताकि एक किराएदार बता सकता है कि उसके भू-स्वामी का सत्वाधिकार समाप्त हो गया है या निर्धारित है। ऐसे मामलों में वह सत्व पर विवाद नहीं करता है और एक