पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 76

59

घटनोत्तर विषय के द्वारा उसको स्वीकार करता है और दूर रहता है। न्याय अपेक्षा करता है कि इस अभिवचन को व्यक्त करने के लिए किराएदार को अनुमति मिलनी चाहिए। एक किराएदार उस व्यक्ति के प्रति उत्तरदायी है जिसका वास्तविक अधिकार है और उसको भुगतान करने के लिए उसका सामना किया जा सकता है, और यह अन्याय होगा यदि ऐसा उत्तरदायी होते हुए, वह बचाव के रूप में अपने भूस्वामी के सत्वाधिकार की समाप्ति या सुनिश्चितता को व्यक्त न कर सके।

  1. विबंधन का क्षेत्र - एक किराएदार या उसके प्रतिनिधि को यह अस्वीकार करने

की अनुमति नहीं दी जाएगी कि उस दिन जिस पर उसकी किराएदारी प्रारंभ हुई

थी, भूस्वामी जिसने किराएदारी प्रदान की, सम्पत्ति के प्रति सत्वाधिकार रखता

था।

  1. यह विबंधन किराएदार को बाध्य करता है केवल उस समय तक जब तक

किराएदारी निरंतर बनी रहती है। एक बार किराएदारी समाप्त हुई, तो वह

अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है कि उसके भूस्वामी का उस दिन भी, जिस

दिन किराएदारी प्रारंभ हुई उसका कोई सत्वाधिकार था।

II. अचल सम्पत्ति का लाइसेंसधारी और लाइसेंसदाता।

  1. लाइसेंसधारी के रूप में नियम वही है, अर्थात् कि लाइसेंस-दाता का ऐसे कब्जे

पर उस समय सत्वाधिकार था जबकि लाइसेंस दिया गया।

  1. एक किराएदार और लाइसेंसधारी के बीच अंतर।

लाइसेंस का अभिप्राय है एक व्यक्ति के द्वारा एक अन्य व्यक्ति को कोई कार्य करने के लिए दी गई अनुमति, जिसे ऐसी अनुमति के बिना उसके लिए उसका करना अवैध होगा। यह एक वैयक्तिक अधिकार है, और हस्तांतरित नहीं है, वरन् उसी व्यक्ति के साथ समाप्त हो जाता है जब तक कि लाइसेंसधारी ने उसके लिए धन अदा नहीं किया है। किराएदारी भूमि में एक हित है और अंतर्णीय एवं पैतृक है।

धारा 117 में है

(1) एक विनिमय विपत्र के ग्राही के विबंधन के साथ।

(2) एक अमानतदार के विबंधन के साथ।

(3) एक लाइसेंसधारी के विबंधन के साथ।

(1) ग्राही से संबंधित विबंधन इस प्रभाव का है कि उसे यह अस्वीकार करने के लिए

अनुमत नहीं करना चाहिए कि आदेशक को विपत्र को प्राप्त करने या उस पर

पृष्ठांकित करने का प्राधिकार था।

इस नियम का कारण, विपत्र धारक और ग्राही के बीच एक सहमति में पाया जाता है।