पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 77

60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

स्वीकृति का अनुबंध क्या आरोपित करता है?

(1) कि वह प्रापक को या धारक को अदा करेगा।

(2) कि यदि वह अदा करने में असफल होता है तो वह अदा करेगा।

इसका क्या अभिप्राय है जब वह कहता है कि आदेशक अदा करेगा? इसका अभिप्राय है कि आदेशक को स्वयं को बाध्य करने का प्राधिकार और सामर्थ्य है।

प्रापक ने उसे इस सहमति के आधार पर लिया था। अतः ग्राही इस सहमति को अस्वीकार करने के लिए अनुमत नहीं किया जाता।

स्पष्टीकरण I के अधीन, वह अस्वीकार करने को अनुमत किया जाता है कि आदेशक के हस्ताक्षर जालसाजी हैं।

यह आंग्लविधि के प्रतिकूल है।

(2) एवं (3) अमानतदार और लाइसेंसधारी के संबंध में विबंधन।

अमानतदार के अमानत करते समय या लाइसेंस प्रदान करते समय लाइसेंसदाता के, प्राधिकार को वे अस्वीकार नहीं कर सकते, उस समय पर जबकि ऐसा उपनिधान या लाइसेंस प्रारंभ हो।

बिना पूर्वाग्रह के वर्णित विषय

  1. इस शीर्षक के अंतर्गत एक पक्ष द्वारा किए गए स्वीकरणों के कुछ वर्ग आते हैं।

  2. धारा 23 में वर्णित कुछ परिस्थितियों के अधीन यदि स्वीकरण किया जाता है, तो

यह उस पक्ष जिसने इसे किया था, के विरुद्ध प्रमाणित नहीं किया जा सकता। 3. वे परिस्थितियां क्या हैं?

(1) यदि यह इस दशा पर किया जाता है कि इसका साक्ष्य नहीं दिया जाना है।

(अ) प्रतिबंधिता व्यक्त हो सकती है, या

(ब) प्रतिबंधिता पक्षों के आचरण से उपलक्षित हो सकती है।

(2) सहमति मौखिक या लिखित हो सकती है।

4. धारा 23 की प्रयुक्ति

  1. यह केवल सिविल मामलों में प्रयुक्त होती है। यह नियम फौजदारी मामलों पर लागू नहीं होता।

  2. इस धारा की प्रयुक्ति न्यायिक अर्थ निर्णय द्वारा उसी के परक्राम्यता के क्रम में किए गए स्वीकरणों तक परिसीमित हो गई है।

यह एकमात्र तथ्य है जो कि एक प्रलेख फ्पूर्वाग्रह के बिनाय् लिखा गया है को