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दृष्टांतः-
डकैती, जनवरी में एक स्थान पर पड़ सकती है, चुराया गया माल फरवरी में एक दूसरे स्थान पर प्राप्तकर्ता को सौंपा जा सकता है और मार्च में एक तीसरे स्थान पर बेच दिया जा सकता है। यह सब उसी संव्यवहार के भाग होंगे।
3. उसी संव्यवहार से अभिप्राय है एक संयुक्त संव्यवहार उसी कार्य के भाग।
वाद विधिः कॉकलेस पृष्ठ 66-68
53 कलकत्ता 372 सिद्धांतः-
- ऐसा साक्ष्य अनुमत किया जाता है क्योंकि वह घटनाओं को बोधगम्य कराता है।
वह संदर्भ प्रदान करता है।
- एक तथ्य जो एक विवाद्यक तथ्य या एक सुसंगत तथ्य के लिए अवसर, कारण,
प्रभाव, या मौके को दर्शाता है का प्रमाण अनुमत है।
- एक पुरुष चोरी का अभियुक्त है। यदि उसके कब्जे से धन नहीं पाया जाता
है, तो संभावना है कि उसने चोरी नहीं की। हर एक कारण का एक प्रभाव
होता है। यदि कोई प्रभाव नहीं था तो कारण नहीं।
- एक पुरुष आक्रमण का अभियुक्त है। - कि वहां एक झगड़ा था, दर्शाना
प्रमाणित किया जा सकता है कि वहां अवसर या कारण था।
- एक पुरुष अपनी पत्नी को जहर देने का अभियुक्त है। - यह दर्शाने को कि
वहां उसे ऐसा करने के लिए मौका नहीं था। यह प्रमाणित किया जा सकता
है कि परिचारिका हमेशा उपस्थित थी।
- अ ब की हत्या करने का अभियुक्त है - यह दर्शाने को कि हत्या करने का
कारण था, प्रमाणित किया जा सकता है कि ब जानता था कि अ ने स से
विवाह किया था और वह अ से मुहभराई चाहता था।
8/3 तथ्य जो विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के लिए प्रेरक हेतु, तैयारी को दर्शाते हैं, का प्रमाण अनुमत किया जाता है।
प्रेरक - दृष्टांत (अ) (ब) प्रेरक हेतु के बिना कोई विवेकी व्यक्ति कार्य नहीं करता है।
तैयारी -दृष्टांत (स) (द) तैयारी के बिना कोई कार्य नहीं किया जा सकता है।
वाद विधि -
61 कलकत्ता 54 - प्रेरक - अभीच्छा-तैयारी-प्रयास-कार्य
आर. बनाम पॉलमेर-कॉकल पी. ने रसोइए को मार दिया
आर्थिक परेशानी, उसका जहर खरीदना