68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
व्यक्ति ने एक कार्य किया है, वह यह अनुवर्तन नहीं करता कि उसने प्रश्नगत विशेष कार्य किया ही हो।
- यदि एक कार्य विशेष किया गया या नहीं, का प्रश्न है तो एक कार्य के क्रम, जिसके अनुसार वह स्वाभाविकतः होगा, को दर्शाने वाले तथ्यों का प्रमाण अनुमत किया जाता है।
दृष्टांत - (अ) (ब)
यह संभावना को दर्शाता है।
प्रश्न है क्या एक पत्र विशेष अ को मिला या नहीं? पत्र डाक में दिया गया था और मृतपत्र कार्यालय द्वारा वापस नहीं किया गया था, प्रमाणित किया जा सकता है।
- कार्यों और दृष्टांतों के साक्ष्य-अधिकारों और प्रथाओं के प्रमाण में।
1. शब्द अधिकार का क्षेत्र।
(अ) यहां तीन प्रकार के अधिकार हैंः
निजी - जैसे एक मार्ग का निजी अधिकार।
सामान्य - व्यक्तियों के एक विचारणीय वर्ग के लिए सामान्य एक अधिकार अर्थात् कूप विशेष के पानी का उपयोग करने को एक ग्राम विशेष के ग्रामीणों का अधिकार। धारा 48 दृष्टांत
लोक - यह अधिनियम में परिभाषित नहीं है। हर एक लोकाधिकार पूर्ववर्ती सामान्य अधिकार की परिभाषा के अर्थ मेंं यह एक सामान्य है, यद्यपि (आंग्लविधि द्वारा किए गए प्रभेद के अनुसार) प्रत्येक सामान्य अधिकार एक लोकाधिकार नहीं है।
यह धारा, शब्द कोई के कारण सभी अधिकारों चाहें वे निजी, सामान्य या लोक के हों, पर प्रयुक्त होती है।
(ब) क्या धारा सभी प्रकार के अधिकारों पर प्रयुक्त होती है? यह प्रश्न शब्द प्रत्येक की अनुपस्थिति के कारण उद्भूत होता है।
एक बार इस प्रश्न पर निर्णयों का एक विवाद था। एक दृष्टिकोण था जो सभी अधिकारों को शामिल करता था। दूसरा दृष्टिकोण था कि वह केवल अभौतिक अधिकारों को शामिल करता है।
अब यह दृष्टिकोण प्रतीत होता है कि यह शब्द सभी अधिकारों को शामिल करता है।
2. शब्द प्रथा का क्षेत्र।
एक प्रथा प्राचीन रूढि़ तक ही सीमित नहीं है वह आचार-व्यवहार को अंतर्विष्ट करती है। व्यवहार, जिसे लोग एक स्थान विशेष में अभी या हाल ही में करने के स्वभाव में हैं सम्मिलित करेंगे। यह तो हो सकता है कि विशेष स्वभाव का बहुत ही जल्दी में उद्भव हो या एक दीर्घकाल से अस्त्तिव में चला आ रहा हो। यदि यह ऐसा