पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 91

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

पूर्व कोर्ट के सामने आना चाहिए।

(3) कुछ ऐसे मामले हैं जहां किसी साक्षी के लिए निश्चयपूर्वक बोलना स्वाभाविक रूप से असंभव है, ऐसे मामले जहां, यदि उसके अभिमत या विश्वास का जरा भी संबंध है, उसे अवश्य बोलना चाहिए, अभिमत के मामले इतने जटिल या अनिश्चित होते हैं, जिनके प्रति वह अभिकथन करता है कि न्यायाधीश उसके अभिमत को उसका जो महत्त्व है, स्वीकार करने को बाध्य है। पूर्ववर्ती विज्ञान कला अथवा कौशल के प्रश्नों को शामिल करने वाले मामले हैं जिनके लिए आवश्यकतः विशेषज्ञों के अभिमत की अपेक्षा की जाती है। परवर्ती मामलों के वर्ग में संस्कारों के प्रश्न को शामिल करने वाले मामले हैं जो विशेषज्ञों के नहीं हो सकते।

(4) अतः साक्ष्य अधिनियम सामान्य नियम के निम्नोक्त अपवाद बनाता है जिसमें एक साक्षी का अभिमत ग्राह्य नहीं है।

धारा 45

(1) दक्ष या वैज्ञानिक साक्षियों (विशेषज्ञों) के अभिमत ग्राह्य साक्ष्य हैं, उन मामलों

को स्पष्ट करने के लिए जो निश्चिततः एक व्यावसायिक या वैज्ञानिक प्रकार है।

उदाहरण के लिए -

(i) विदेश-विधि का प्रश्न।

(ii) विज्ञान या कला का प्रश्न (एक मशीनगन का कार्य)।

(iii) हस्तलेखन या अंगुलियों की छाप की पहचान से संबंधित प्रश्न।

धारा 47

(2) एक व्यक्ति जिसके द्वारा प्रलेख लिखा गया या हस्ताक्षरित था, की पहचान के

प्रश्न पर उस हस्तलेख के साथ परिचित व्यक्ति का अभिमत सुसंगत है।

धारा 48

(3) जहां न्यायालय को, किसी सामान्य परंपरा या संबंध में एक अभिमत बनाना है

उसके अस्तित्व को जानने के प्रति व्यक्तियों का अभिमत सुसंगत है।

धारा 49

(4) जब न्यायालय को एक अभिमत बनाना है, जैसे किः-

  1. परिवार या मनुष्यों के किसी व्यक्ति के सिद्धांत और रीति-रिवाज।

  2. विशेष जनपदों या लोगों के विशेष वर्गों में उपयोगी शब्दों या पदों के अर्थ।

  3. उन पर ज्ञान के विशेष साधन रखने वाले व्यक्तियों के अभिमत सुसंगत तथ्य हैं।

धारा 50

(5) जब न्यायालय को दो व्यक्तियों के बीच नातेदारी के संबंध में एक अभिमत बनाना

है, तो विषय पर ज्ञान के विशेष साधन रखने वाले और पक्षों के आचरण पर