पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 92

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आधारित व्यक्तियों के अभिमत सुसंगत तथ्य हैं।

दृष्टांत - (अ) (ब)

परन्तुकः

ऐसा अभिमत, भारतीय वैवाहिक विच्छेद अधिनियम के अंतर्गत विवाह या भारतीय दंड संहिता की धारा 494, 495, 497, 498 के अधीन अभियोगों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

प्रमाण के लिए अपेक्षित साक्ष्य का स्वरूप

विधि का संक्षिप्त विवरण

(i) सर्वोत्तम साक्ष्य का नियम।

(ii) सर्वोत्तम साक्ष्य नियम की अपेक्षाएं।

(i) सर्वोत्तम साक्ष्य का नियम अपेक्षा करता है।

(अ) यह कि यदि साक्ष्य मौखिक है, तब यह प्रत्यक्ष होना चाहिए। (ब) अपवाद

(ii) सर्वोत्तम साक्ष्य का नियम अपेक्षा करता है कि यदि साक्ष्य प्रलेखी है तब। (i) यह मौलिक होना चाहिए।

(अ) अपवाद

(ii) यह अनन्य हो।

(अ) अपवाद।

सर्वोत्तम साक्ष्य का नियम

  1. विधि की यह अखंडनीय प्रस्थापना है कि वह पक्ष जिसको कोई तथ्य

प्रमाणित करना है उसको वह सर्वोत्तम साक्ष्य द्वारा करना चाहिए जो मामले

की नैसर्गिकता के योग्य है।

  1. यह नियम वस्तुतः कहा जाए, तो समग्र साक्ष्य विधि का आधार होता है।

(i) यह इस नियम के कारण है कि विधि-साक्ष्य की ग्राह्यता के लिए एक

पूर्वगामी मिसाल के रूप में अपेक्षा करती है कि मुख्य और साक्ष्य

तथ्यों के मध्य एक खुला एवं देखने योग्य संबंध होना चाहिए।

(ii) यह इसी नियम के कारण है कि विधि अपेक्षा करती है कि साक्ष्य

ग्राह्य होने के क्रम में, उपयुक्त उपकरणों के द्वारा आना चाहिए।

(iii) यह इसी नियम के कारण है कि विधि अपेक्षा करती है कि साक्ष्य

ग्राह्य होने के लिए नकली नहीं, मौलिक होना चाहिए। 3. एक समय सर्वोत्तम साक्ष्य का नियम बहुत कठोरतः लागू किया जाता था

किन्तु अब इसका प्रयोग अत्यंत सरल हो गया है और एक समय जो ग्राह्यता

के प्रतिवाद थे अब मात्र भार की पर्याप्तता हो गई।