78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
विषय के सत्य को प्रमाणित करने के लिए एक दृढ़ कथन है।
- क्या एक गैर-साक्षी के द्वारा कथन किए गए कथन को साक्ष्य में प्रस्तुत किए
जाने के लिए व्यवस्थित किया जाता है और उसकी ग्राह्ययता प्रश्नांकित है,
मात्र एक विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है
और विषय के सत्य को प्रमाणित करने के लिए एक अनुसमर्थन के रूप में
प्रस्तुत किया जाता है और उस प्रयोजन, जिसके लिए प्रस्तुत किया जाता है
पर निर्भर करता है वह परीक्षण प्रयोजन है।
- जनश्रुति के अपवर्जन का नियम एक संकुचित भाव साथ ही एक विस्तृत
भाव में भी कहा जाता है। उसके संकुचित भाव में वह अभिकथित लक्ष्य के
सत्य को प्रमाणित करने के लिए अशपथित कथनों तक परिबद्ध किया जाता
है। उसके विस्तृत भाव में वह किसी भी प्रयोजन के लिए प्रस्तुत अशपथित
साक्षियों के सभी कथनों को अन्तर्विष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता
है। अर्थात् अन्तर्विष्ट कथनों को मात्र तथ्यों की तरह प्रयोग किया जाता है। साक्ष्य अधिनियम में अंगीकृत नियम
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम इस नियम को मान्यता प्रदान नहीं करता कि एक
तथ्य के अस्तित्व या अनस्तित्व के सम्बन्ध में, जिसकी जांच की जा रही है,
और न्यायालय में परीक्षणाधीन हो साक्षी द्वारा किया गया कोई कथन साक्ष्य
के रूप में उपयोग किया जा सकता है। - फ्मार्कबीय्
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत गैर-साक्षियों के कथन ग्राह्य है, जहां
कथन करने में उसकी यथार्थता सारभूत प्रश्न नहीं है।
- अतः
(i) कथन, जो मामले से संबद्ध तथ्य के अंग हैं क्या एक विवाद्यक तथ्य
या उसके संलग्नित होने वाले को वस्तुतः संघटित करते हैं।
(ii) स्वामित्व के कार्यों के समान होने वाले कथन जैसे पट्टठ्ठे, अनुज्ञप्तियां
और अनुदान (धारा 13)
(iii) कथन, जो साक्षी के साक्ष्य (कथन) का समर्थन या खंडन करते हैं
(धारा 155, 157, 158) ग्राह्य हैं हालांकि वे गैर-साक्षियों के कथन
हैं।
- जनश्रुति के अपवर्जन का नियम केवल गैर-साक्षियों द्वारा किए गए कथनों
पर प्रयुक्त होता है, जो कहे गए तथ्यों के सत्य को प्रमाणित करने के लिए
उपयोग किए जाते हैं।
4. इस नियम के अपवाद क्या हैं?
(1) साक्ष्य अधिनियम में उल्लिखित साक्ष्य के नियम के अंतर्गत उसमें व्यक्त तथ्यों