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की सत्यता को प्रमाणित करने वाले एक गैर-साक्षी का कथन अमान्य है।
- इस नियम के अपवाद हैं।
अपवाद धारा 32 में अंतर्विष्ट हैं
- जब एक व्यक्ति मृत है, या पाया नहीं जा सका है, या साक्ष्य देने लायक
नहीं है या जिसकी उपस्थिति बिना विलम्ब या व्यय के प्राप्त नहीं की जा
सकती है, ऐसे व्यक्ति के द्वारा किए गए लिखित या मौखिक कथन प्रमाणित
किए जा सकते हैं यदि कथन धारा 32 में वर्णित 8 संवर्गों में से किसी एक
के अंतर्गत आते हैं।
(i) जब वह उसकी मृत्यु के कारण के संबंध में हो (अ)
(ii) जब वह व्यवसाय के क्रम में किया जाता है। (ब) (ज)
(iii) जब वह कथन वाले के आर्थिक या संपत्ति के हित के विरुद्ध है या जो
यदि सत्य हो तो उसको दंड अभियोजन या क्षतिपूर्ति वाले मामले के लिए
आरोपित कर देगा। दृष्टा (ई) (फ)
(iv) जब वक्तव्य सामान्य हित के मामले या परंपरा या लोकाधिकार के
संबंध में अपनी राय देता है, बशर्ते कि ऐसा अभिमत विवाद उठने से
पूर्व दिया गया हो। दृष्टा (ज)
(v) जब वह कथन संबंध रक्त, विवाह या दत्तक से संबंधित है और
उस व्यक्ति को विशेष ज्ञान था और विवाद के पूर्व दिया गया कथन
था।
(vi) जब वह कथन मृतक व्यक्तियों के संबंध के अस्तितव से संबंधित है
और किसी वसीयत, पारिवारिक कार्यों से संबंधित विलेख, पारिवारिक
वंशावली, किसी समाधि के पत्थर पर और परिवार चित्रावली आदि,
में किया गया है और विवाद से पूर्व किया गया है।
(vii) जब वह कथन किसी विलेख, वसीयत या अन्य प्रलेख जो किन्हीं
कार्यवाहियों, जैसे धारा 13, खण्ड (अ) में वर्णित हैं, से संबंधित
है।
(viii) जब वह कथन प्रभावों या भावनाओं को व्यक्त करने वाले अनेक
व्यक्तियों द्वारा किया गया है। दृष्टांतः -
धारा 33 में अंतर्विष्ट अपवाद
- जब एक व्यक्ति मृत है, या पाया नहीं जा सकता है, या साक्ष्य देने के लिए अयोग्य है या विरोधी पक्ष द्वारा मिलने से अलग कर दिया गया है, या यदि उसकी उपस्थिति, व्यय करने पर बिना युक्तियुक्त विलम्ब के उपलब्ध नहीं की जा सकती है तब