81
(2) वह धारा पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख को यह दर्शाने के लिए साक्ष्य नहीं बनाती
कि एक विशेष इंदराज है -
10 कलकत्ता 1024, 25 इलाहाबाद 90 (3) धारा मामलों के वर्ग तक परिबद्ध नहीं है जहां लोकाधिकारी को एक रजिस्टर या
अन्य पुस्तक में किसी वास्तविक तथ्य जो उसकी जानकारी में है इंदराज करना
है -
20 कलकत्ता 940 (4) यद्यपि एक लोक-सेवक द्वारा अपने शासकीय कर्त्तव्य के निर्वहन में इंदराज कर
दी गई है या विधि द्वारा विशेषतः आदेशित एक कर्त्तव्य के सम्पादन में की गई
हो, किंतु यह ऐसी एक इंदराज नहीं होनी चाहिए, जिसे एक लोक-सेवक द्वारा
करने की अपेक्षा की जाती है या अनुज्ञात की जाती है, या जिसके लिए अपने
कर्त्तव्यों की अनभिज्ञता, सनक से या अन्यथा एक व्यक्ति जिसे प्रविष्टि में व्यक्त
तथ्यों के सत्य का ज्ञान था, के आज्ञापन (डिक्टेंशन) पर किया जाना चुना जा
सकता है।
25 इलाहाबाद 90 एफ.बी. 101 2. यह आवश्यक नहीं है कि इंदराज रोजाना किया जाए या (जैसे बैंकों में) घंटे-घंटे
में जैसे कार्यवाही की जानी चाहिए। समय जब इंदराज की जाती है आवश्यक नहीं
है। जो आवश्यक है वह यह है कि वे निश्चित क्रम में नियमित रूप से की जानी
चाहिए। प्रविष्टि में विलम्ब उसके मान को प्रभावित कर सकता है, किंतु उसकी
मान्यता को प्रभावित नहीं कर सकता है।
27 कलकत्ता 118 (पी.सी.), 13 सी.एल.जे. 139 3. यद्यपि व्यवसाय के क्रम में नियमित रूप से रखे गए लेखों की पुस्तकों में वास्तविक
प्रविष्टियां सुसंगत हैं, पुस्तक स्वतः
उससे संबंधित किसी प्रविष्टि की अनुपस्थिति द्वारा एक अभिकथित कार्यवाही को अप्रमाणित करने के लिए, सुसंगत नहीं है।
टिप्पण्ीः वह धारा 9 के अंतर्गत और 11-19 सी.एन. 1024 ग्राह्य हो सकती है।
इंदराज के बिना निकाले गए अनुमानों के लिए।
30 कलकत्ता 231 (247) पी.सी.
- इंदराज पुस्तक रजिस्टर या अभिलेख में होनी चाहिए। इंदराज पत्राचार को अंतर्विष्ट नहीं करती है।
7 एम.एल.आई. 117
दृष्टांतः-
(1) जन्म-मरण रजिस्टरों में इंदराज।