पुनरीक्षण अधिकारिता - Page 99

82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(2) जन्म और राजस्व रजिस्टरों में इंदराज।

(3) जन्म और विवाह रजिस्टरों में इंदराज।

  1. विवाद्यक तथ्यों या सुसंगत तथ्यों के मानचित्रों एवं लेख चित्रों में किए गए अभिकथन।

1. ग्राह्यता की शर्तें

धारा मानचित्रों और कार्यप्रणाली के दो वर्गों को संदर्भित करती है।

(अ) वे सामान्यतः लोक-विक्रय के लिए अर्पित किए जाते हैं, और

(ब) मानचित्रों या कार्यप्रणाली को शासन के प्राधिकारी के अधीन निर्मित किया जाए।

(अ) की ग्राह्यता के लिए कारणः-

प्रकाशन समग्र समुदाय के लिए सुगम्य होने और सभी संभावनाओं की आलोचनाओं के लिए खुला होना और उपाहूत या अनावृत्त होती हुई अयथार्थता के पक्ष में है।

(ब) की ग्राह्यता के लिए कारणः-

सरकार के प्राधिकार के अधीन बनाए गए और प्रकाशित किए गए और उनको सक्षम व्यक्तियों द्वारा अध्ययन एवं जांचों के परिणाम होना मानना चाहिए।

  1. किसी अधिनियम में तथ्यकथन में किया गया कथन या राजपत्र में प्रकाशित हुई सरकार की अधिसूचना।

कारणः-

  1. गजट और अधिनियम ग्राह्य हैं क्योंकि वे एक शासकीय कर्त्तव्य के क्रम में सरकारी

कर्मचारियों द्वारा बनाए जाते हैं और राजकीय प्राधिकारी के अधीन प्रकाशित किए

जाते हैं और उनमें व्यक्त तथ्य जनता की प्रकृति एवं ख्याति हैं। 2. उनमें व्यक्त तथ्य लोक प्रकृति के हैं और सशपथ साक्षियों द्वारा उन्हें प्रमाणित

करना प्रायः कठिन होगा।

  1. यदि न्यायालय को एक लोक प्रकृति के किसी तथ्य के अस्तित्व के रूप

में एक अभिमत बनाना है तो यह सुसंगत है।

  1. लोक-प्रकृति। (व्याख्यायित नहीं - संपादक)

  2. धारा संसद के सार्वजनिक एवं असार्वजनिक अधिनियम के मध्य कोई भेद

नहीं करती। वह मात्र अपेक्षा करती है कि दोनों में से किसी एक में वर्णित

तथ्य लोक प्रकृति का होना चाहिए।

  1. जहां तक साक्ष्य अधिनियम का संबंध है वृत्तांत निश्चायक नहीं है। तो भी

वे स्पष्टतः निश्चायक होने वाले घोषित किए जा सकते हैं।

  1. एक तथ्य के अस्तित्व को दर्शाने के लिए एक वृत्तांत को प्रमाणित करना

है। यह कोई साक्ष्य नहीं है कि विशेष व्यक्ति उसके अस्तित्व को जताना हो।