एक - कोरेगांव - Page 21

6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

पहुँचने के लिए उत्सुक थे। हम चाहते थे कि गाड़ी चलती रहे। लेकिन शीघ्र ही हमारे चारों ओर अंधेरा छा गया। अंधेरे को दूर करने के लिए कोई रोशनी नहीं थी। कोई स्त्री, पुरुष या पशु चलता दिखाई नहीं दिया जिससे हमें महसूस हो कि हम उनके बीच चल रहे हैं। हमें एकांत में डर लगने गला जिसने हमें चारों ओर से घेर लिया था। हमारी चिन्ता बढ़ रही थी। हमने हिम्मत से काम लिया। हम मसूर से बहुत दूर आ चुके थे। कोई तीन घंटे से अधिक यात्रा कर चुके थे। लेकिन गोरेगाँव का कोई संकेत नहीं था। हममें एक विचित्र विचार उत्पन्न हुआ। हमें संदेह होने लगा कि गाड़ीवान विश्वासघात करना चाहता है। वह हमें मारने के इरादे से किसी एकान्त स्थान पर ले जा रहा है। हमारे पास सोने के बहुत से जेवरात थे, जिससे हमारी आशंका को बल मिला। हमने उससे पूछा कि गोरेगाँव कितना दूर है। वहाँ पहुँचने में देर क्यों हो रही है। वह कहता रहा, बहुत दूर नहीं है, हम वहाँ शीघ्र पहुँच जाएंगे। जब रात के लगभग 10 बज गए और हमें गोरेगाँव का कोई निशान दिखाई नहीं दिया तो हम बच्चों ने चिल्लाना और बुरा-भला सुनाना शुरू कर दिया। हमारा रोना-चिल्लाना देर तक चलता रहा। गाड़ीवान ने कोई उत्तर नहीं दिया। अचानक हमने थोड़ी दूरी पर दीपक जलता देखा। गाड़ीवान ने कहा, फ्क्या तुम्हें वह रोशनी दिख रही है? वह चुंगी कलक्टर की रोशनी है। हम वहाँ रात को आराम करेंगे।य् हमने कुछ राहत महसूस की और चिल्लाना बन्द कर दिया। रोशनी दूर थी। हम उस तक कभी पहुंचते दिखाई नहीं दे रहे थे। चुंगी-कलक्टर की कुटीर तक पहुँचने में हमें दो घंटे लगे। समय के अन्तराल में हमारी चिन्ता और बढ़ गई और हम गाड़ीवान से तरह-तरह के प्रश्न पूछते रहे, जैसे कि वहां पहुँचने में देर क्यों हो रही है, क्या हम उसी सड़क पर जा रहे हैं, इत्यादि।

अन्ततः आधी रात गाड़ी चुंगी-कलक्टर की कुटीर पर पहुँची। यह एक पहाड़ी के नीचे लेकिन पहाड़ी की दूसरी ओर स्थित थी। जब हम वहां पहुंचे तो हमने बहुत-सी बैलगाडि़याँ वहाँ देखीं। ये सब वहाँ रात को आराम करने के लिए रुकी थीं। हमें बहुत भूख लगी थी और हम भोजन करना चाहते थे। लेकिन यहां भी पानी का प्रश्न था। हमने अपने गाड़ीवान से कहा क्या पानी मिल सकता है? उसने हमें चेतावनी दी कि चुंगी-कलक्टर हिन्दू था यदि तुमने सत्य कहा कि हम महार हैं तो यहाँ पानी नहीं मिल सकेगा। उसने कहा, फ्तुम कहना हम मुसलमान हैं और अपना भाग्य आजमाओ।य् उसकी सलाह पर मैं चुंगी-कलक्टर की कुटीर में गया और उससे कहा आप हमें कुछ पानी देंगे। फ्तुम कौन हो?य् उसने पूछा। मैंने उत्तर दिया कि हम मुसलमान हैं। मैंने उससे उर्दू में बातचीत की, जो मैं बहुत अच्छी तरह जानता था, ताकि मेरे मुसलमान होने में कोई संदेह न हो। लेकिन यह चाल कामयाब नहीं हुई और उसने कड़े रुख में उत्तर दिया फ्तुम्हारे लिए पानी किसने रखा है। पानी ऊपर पहाड़ी पर है यदि तुम चाहो तो जाकर ले आओ, मेरे पास कोई पानी नहीं है।य् इस प्रकार उसने मुझे टाल दिया। मैं गाड़ी की