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भारत के इतिहास पर टिप्पणी

(हस्तलिखित पांडुलिपी से उद्धृत-सम्पादक)
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भारत के इतिहास के लिए आधुनिक तुर्की कबीलों से मिलते-जुलते मध्य एशिया के भ्रमणशील शकों और यू-ची कबीलों के लिए जीतों का अधिक महत्त्व है। ख्1, शक पहले इली नदी की घाटी में रहते थे। यू-ची आगे बढ़े तो इन्हें दक्षिण की ओर हटना पड़ा और वे अन्ततः 150 ई. पू. में उत्तर-पश्चिम भारत में पहुँचे। वहाँ उन्होंने कई छोटे राज्य स्थापित किए जिनके राजाओं ने, जान पड़ता है, कुछ समय के लिए पार्थियनों के आधिराज्य को स्वीकार कर लिया और क्षत्रप की उपाधि धारण कर ली। यह साफ है कि पश्चिमी भारत विदेशी राजाओं की झोली में चला गया जो शक, यवन या पल्लव कहलाए। जिनकी शासन-सीमाएँ और सम्बन्ध लगातार बदलते रहे। इन राज्यों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण फ्महान क्षत्रपय् जाने जाते थे जिसमें सौराष्ट्र (काठियावाड़) व उसके आसपास के मुख्य भूमि के भाग सम्मिलित थे जो लगभग 395 ई. पू. तक रहे।

ई. पू. 100 के लगभग यू-ची ने चीन के सीमाप्रान्त से पश्चिम की ओर प्रस्थान किया और शकों को आगे खदेड़ते हुए कैदफीसेस बैक्ट्रिया में बस गए। यहां कुषाण नामक उनके एक कबीले का मुखिया, जिनका नाम कैदफीसेस था, दूसरों पर अपना अधिकार जमाने में सफल हुआ। उसने एक राष्ट्र की स्थापना की जो कबीले के नाम से जाना जाने लगा। कुषाण साम्राज्य का कालक्रम भारतीय इतिहास का एक जटिल प्रश्न है और नीचे दी गई निश्चित तारीखों का उल्लेख इसलिए किया गया है कि विस्तृत वाद-विवाद के लिए कोई गुंजाइश नहीं है और तथ्यों पर आधारित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

1. लेकिन कदाचित भाषा में नहीं। हाल की खोज से इस बात के संकेत मिले हैं कि कुषाण या यू-ची

ने संभवतया ईरान की बोली का प्रयोग किया।