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कैदफीसेस प्रथम (15-45 ई.) अपने साम्राज्य को संगठित करने के पश्चात् अपनी फौजों के साथ दक्षिण की ओर बढ़ा, काबुल और संभवतया कश्मीर को जीता उसके उत्तराधिकारी कैदफीसेस द्वितीय (45-78 ई.) ने उत्तरी सिंध समेत सम्पूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत की ओर संभवतया बनारस को अपने साम्राज्य में शामिल कर लिया। उस समय भारत और रोमन साम्राज्य के बीच अच्छा व्यापार था और कनिष्क (78-123 ई.), जो कैदफिसेस का उत्तराधिकारी था, ने दूतावास को ट्रोजन भेज दिया। इस राजा ने बाद के बौद्ध इतिहास में वही भूमिका निभाई जो अशोक ने पहले के इतिहास में निभाईं ख्1, उसने पार्थियों व चीनियों से युद्ध किए और उनके साम्राज्य में, जिसकी राजधानी पेशावर थी, अफगानिस्तान, बैक्ट्रिया, काशगर, पारखिड, खोटान ख्2, और कश्मीर शामिल थे। ये उपनिवेश, जो संभवतया पूर्व में गया तक फैले हुए थे, उसके उत्तराधिकारी हाविस्का (123-140 ई.) और वासुदेव (140-178 ई.) द्वारा अपने अधिकार में बनाए रखे गए। लेकिन इस अवधि के पश्चात् कुषाण और आन्ध्रा भारत की शक्ति के तौरपर समाप्त हो गए, यद्यपि कुशण राजा काबुल पर शासन करते रहे। उनके पतन के कारण अज्ञात हैं। लेकिन इसे पर्सिया के सानिड्स के उत्थान से जोड़ा जा सकता है। भारत का 100 से अधिक वर्षों का राजनैतिक इतिहास बिल्कुल कोरा है और उसके बारे में इतना कहा जा सकता है, कि सौराष्ट्र राज्य शक राजवंश के अंतर्गत चलता रहा।
गुप्त राजवंश के उत्थान के साथ पुनः राजनैतिक इतिहास प्रकाश का प्रादुर्भाव हुआ जो आधुनिक हिन्दू धर्म के आरंभ और बुद्ध धर्म के लिए प्रतिक्रिया का सूचक है। यद्यपि मौर्य वंश की प्राचीन शाही नगरी पाटलीपुत्र के भाग्य के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। यह हमारे समय के पहले तीन सौ वर्ष तक लगातार बनी रही। 320 ई. में चंद्रगुप्त प्रथम स्थानीय राजा ने अपने उपनिवेशों में वृद्धि की और गुप्तकाल की संस्था द्वारा राज्याभिषेक करवाया। उसके लड़के समुद्रगुप्त ने अपनी लड़ाईयाँ जीतने का सिलसिला जारी रखा और एक असाधारण मुहिम में जो लगभग 340 ई. में समाप्त हुई, उसने सम्पूर्ण प्रायद्वीप को अधिकार में कर लिया। उसने इन सब क्षेत्रों को अपने अधिकार में बनाए रखने का कोई प्रयत्न नहीं किया लेकिन उसका प्रभुत्व बड़े क्षेत्र में हुगली से यमुना और पश्चिम में चंबल नदी तक तथा हिमालय से नर्मदा तक फैला हुआ था। चंद्रगुप्त द्वितीय या विक्रमादित्य ने अपने अधिकार क्षेत्र में मालवा, गुजरात और काठियावाड़ को जोड़ा और 50 से अधिक वर्षों तक गुप्तों ने लगभग पूरे उत्तरी भारत पर बिना किसी विघ्न
1. फलौट एवं फ्रैन्क समझते हैं कि कनिष्क ने दो कैडफिंसैस के पूर्व 58 ई पू. शासन प्रारम्भ किया
था।
2. ऐसा प्रतीत होता है कि उसे इन क्षेत्रों में चीनी जनरल पान-चो ने 90 ई. के आसपास हराया लेकिन
15 वर्ष बाद वह अधिक सफल हुआ।