44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
कन्नौज की बंगाल के पालों से प्रायः लड़ाई होती रहती थी जो बौद्ध राजा थे जिनका आरम्भ 730 ई. में हुआ था। धर्मपाल (800 ई.) काफी शक्तिशाली था और उसने कन्नौज के राजा को गद्दी से उतार दिया। बाद मेंं पाल राज्य का पूर्वी भाग पृथक हो गया जो स्वयं सेना नामक विरोधी राजवंश के अधीन हो गया।
जमुना के दक्षिण में स्थित जेजकाभुक्ति (बुन्देलखण्ड) और चेदि (जो मध्य राज्यों के बराबर था) जिलों में चंदेल और कलचूरी नामक दो राजवंशों का राज्य था। ऐसा समझा जाता है कि वे आरम्भ में गौंड थे। इन्होंने बहुत सी इमारतें बनवाईं जिनमें
खासतौर से खजुराहो के मंदिर शामिल हैं। कीर्ति वर्मन चंदेल (1049-1107 ई.) ने उनके राज्य-क्षेत्रों को बहुत बढ़ाया। वह शिक्षा का हिमायती था और अन्योक्तिपरक नाटक फ्प्रबोध-चंद्रोदयय् उसके दरबार में तैयार किया गया था।
- इसी प्रकार मालवा के परमार (पवार) राजवंश को साहित्य का हिमायती माना जाता था और राजा मुंज (974-995 ई.) एवं भोज (1010-1060 ई.) लेखक व सफल योद्धा थे।
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शक युग
विन्सैन्ट स्मिथ के अनुसार, पहले 78 ई. जो अत्यधिक संभाव्य जान पड़ती है, अपनाने के पश्चात् अन्तिम तौर पर 120 ई. को चुना गया और हम मान सकते हैं कि इस तारीख से, जिसका आरम्भ कनिष्क ने किया, शक युग आरम्भ होता है।
मुख्य कुषाण राजा किस क्रम में आए, इनके बारे में अभी भी निश्चित-तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। प्रायः यह माना जाता है कि कनिष्क कदाफिसेस प्रथम (कुजुला कारा कदाफिसेस) और द्वितीय (विम कदाफिसेस) के पश्चात् आया। इन दोनों से पहले बैक्ट्रीनिज सीथियन ने, डॉ. स्मिथ के अनुसार, 40 ई. के करीब सत्ता अवश्य प्राप्त कर ली होगी। उसने गांधार और तक्षशिला की गद्दी व पार्शिया के राजा गान्डोफेरस से छीनी जिसने धर्म-प्रचार के प्रक्षिप्त कार्यों के अनुसार संत-थोमस का स्वागत किया। उसके लड़के विभा (78-110 ई.) ने अपने लिए एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जिसमें पंजाब और गंगा घाटी का पूरा पश्चिमी भाग शामिल था।
ऐसा में मालू होता है कि कदाफिसेस और कनिष्क के मध्य 10 वर्ष का अंतराल रहा। कनिष्क वाजिष्क वाकि पुत्र था और उनके पूर्वजों का संबंधी नहीं था। ऐसा प्रतीत