48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
दिया, लेकिन उन्हों सीमाओं से दूर हटा दिया गया। समुद्रगुप्त के समय भयानक प्रवसन की पहली लहर उन्हीं सीमाओं में आई। इसमें मांगेल के खानाबदोश लोग थे जिनको भारतीयों ने बाद में उचित नाम हूण दिया, जिन हूणों ने यूरोप पर आक्रमण किया उनको भी हम इसी नाम से पहचानते हैं। पाँचवीं शताब्दी के मध्यकाल के पश्चत भारत पहुँचे हूण सफेद हूण थे अथवाएरिलिदेंस जो बनावट में अट्टठ्ठीला के भयंकर अनुचरों की अपेक्षा तुर्कों के अधिक निकट थे। आक्सस घाटी में ठहरने के पश्चात् उन्होंने पार्शिया और काबुल पर अधिकार कर लिया। स्कन्दगुप्त ने उन्हें कई वर्षों के लिए भगा दिया था (455 ई.)। लेकिन 484 ई. में सस्सानिंदऽ की इनके द्वारा हत्या कर दिए जाने के पश्चात् कोई भारतीय राज्य उनको नहीं रोक पाया। उनमें से तोरामन नामक एक ने 500 ई. में अपने को मालवा में स्थापित कर लिया और उसके लड़के मिहिरगुल ने पंजाब में सकोल (स्यालकोट) में अपनी राजधानी स्थापित कर ली।
एक स्थानीय राजकुमार यशोधरमन ने मिहिरगुल की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया। हुणों को सभी जगहों से पूरी तरह नहीं निकाला गया। बहुत से हूण सिंधु घाटी में रह गए।
सातवीं शताब्दी के आरम्भ में दिल्ली के निकट एक छोटे से प्रदेश स्थानविस्वर (थानेश्वर) में अव्यवस्था होने पर एक बड़ी शक्ति उभरी। वहाँ एक साहसी राजा प्रभाकर बर्द्धन ने राजय संगठित किया जिसने गुर्जरों, मालवों और अन्य पड़ोसी राजाओं के विरुद्ध साहस का प्रदर्शन किया। 604 ई. या 605 ई. में उसकी मृत्यु के पश्चात् तुरन्त ही उसके बड़े लड़के की बंगाल में गौडस के राजा के आदेश से हत्या कर दी गई। सत्ता उसके छोटे भाई हर्ष को मिली।