50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
कि इससे बड़ी कोई भूल नहीं हो सकती। मनु प्राचीन काल का मामला नहीं है। यह प्राचीन से अधिक वर्तमान का है। यह एक जीवन्त अतीत है, और इसलिए उतना ही वर्तमान है जितना कि वर्तमान हो सकता है।
अंग्रेजी शासन से पहले मनु द्वारा प्रतिपादित असमानता देश की कानून थी इसके बारे में बहुत से विदेशियों को जानकारी नहीं है। कुछ उदाहरणों से ही स्पष्ट हो जाएगा कि वस्तुस्थिति ऐसी ही थी।
मराठों और पेशवाओं के शासनकाल में अछूत शाम 3 बजे से प्रातः 9 बजे तक बीच पेशवाओं की राजधानी पूना शहर के द्वार के अंदर नहीं जा सकते थे क्योंकि सायं 3 बजे के पश्चात् और प्रातः 9 बजे से पहले इनके शरीर की परछाई लम्बी होती थी और इसकी परछाई जब किसी ब्राह्मण पर पड़ती थी वह अपवित्र हो जाता था और जब तक वह इस अपवित्रता को दूर करने के लिए स्नान नहीं करता था तब तक वह कुछ भी खा-पी नहीं सकता था। इसी प्रकार कोई अछूत शहर के भीतर नहीं रह सकता था_ पशु और कुत्ते तो बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश कर सकते थे लेकिन अछूत नहीं आ सकते थे। ख्1,
मराठाओं और पेशवाओं के शासनकाल में अछूत भूमि पर थूक नहीं सकते थे क्योंकि हिन्दुओं के पांव का इससे स्पर्श होने से हिन्दू अपवित्र हो जाता था, अछूतों को अपनी थूक डालने के लिए अपने गर्दन के इर्द-गिर्द एक मिट्टठ्ठी का बर्तन लटकाना पड़ता था। उन्हें अपने पदचिह्नों को मिटाने के लिए अपने साथ एक पेड़ की कांटेदार टहनी घसीटनी पड़ती थी और जब कोई ब्राह्मण उसके पास आ जाता था तो अपना मुँह उल्टा करके कुछ दूरी पर लेटना पड़ता था ताकि उसकी परछाई ब्राह्मण पर न पड़े। ख्2,
महाराष्ट्र में एक अछूत को अपने गले में या अपनी कमर पर एक काला धागा पहनना पड़ता था ताकि उसकी आसानी से पहचान हो सके। ख्3,
गुजरात में अछूतों को अपनी अलग पहचान के लिए सींग लगानी पड़ती थी।
1. डॉ. मरे मिचेल - ग्रेट रिलीजन ऑफ इंडिया, पृष्ठ 64।
2. बांबे गजेरियर, वाल्यूम XII , पृष्ठ 175।
3. एनसाइक्लो. आर एंड ई वाल्यूम IX पृष्ठ 636।
4. पंजाब सेंसेस रिपोर्ट 1911 पृष्ठ 413।