4. मनु और शूद्र - Page 66

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पंजाब में एक मेहतर को शहर की गलियों में चलते समय अपने हाथ में या बगल के नीचे एक झाडू उठाना पड़ता था ताकि लोग जान जाएं कि वह सफाई कर्मचारी है। ख्4,

बम्बई में अछूत साफ या बिना फटे कपड़े नहीं पहन सकते थें वास्तव में दुकानदार किसी अछूत को कपड़ा बेचने से पहले एहतियात के तौर पर उसे फाड़ देते थे और उस पर धब्बा लगा देते थे।

मालबार में अछूतों को एक मंजिल से ऊँचे मकान बनाने की आज्ञा नहीं थी ख्1, और वे अपने मुर्दों को दफना भी नहीं सकते थे। ख्2,

मालाबार में अछूतों को छाता ओड़ने, जूते या सोने के आभूषण पहनने, गाय का दूध निकालने या देश की साधारण भाषा का प्रयोग करने की इजाजत नहीं थी। ख्3,

दक्षिण भारत में अछूतों को अपने बदन का कमर के ऊपर का भाग ढकने की जानबूझकर मनाही थी और अछूत महिलाओं के मामले में उनको कमर के ऊपर का भाग नंगा रखने के लिए मजबूर किया जाता था। ख्4,

बम्बई प्रेसीडेन्सी में सुनार जैसी ऊँची जाति के लोगों को मोड़कर धोती पहनने से रोका जाता था ख्5, और वे अभिवादन के लिए नमस्कार शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते थे। ख्6,

मराठा शासन काल के दौरान ब्राह्मण के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति वेद मंत्रों का उच्चारण करता था तो उसकी जीभ काटी जा सकती थी। पेशवाकाल में अनेक सुनारों की जीभ काटी गई थी क्योंकि उन्होंने कानून के विरुद्ध वेदों का उच्चारण करने का साहस किया था।

भारत में कहीं भी ब्राह्मण को मृत्यु-दण्ड नहीं दिया जाता था। वह हत्या भी कर देता था तो भी उसे फाँसी नहीं दी जा सकती थी।

1. भट्टाचार्यः हिंदू वर्ग पृ. 259 ।

2. मद्रास जनगणना 1891, पृ. 299 ।

3. भट्टाचार्यः हिंदू जातियाँ, पृ. 259 ।

4. मद्रास जनगणना 1891, पृ. 224 ।

5. ब्राह्मण ही केवल धोती मोड़कर पहन सकते थे शूद्र नहीं

6. जी. बी. फारेस्ट, आफिसियल राइटिंग ऑफ मांउटस्टुअर्ट एल्फिनस्टेन 1884 पृ., 310-11।