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दमन करके सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखा जाए। हिन्दू सामाजिक व्यवस्था ने पहले तरीके को अपनाया है। इसमें निम्न वर्गों की आने वाली सभी पीढि़यों के लिए सामाजिक स्थिति निश्चित की गई है। उनकी आर्थिक-स्थिति भी निश्चित कर दी गई है। दोनों के बीच विषमता न होने के कारण किसी शिकायत के पैदा होने की संभावना नहीं है। इसमें निम्न वर्गों को शिक्षा का अधिकार नहीं दिया गया है। परिणामतः कोई नहीं जातना कि उसकी निम्न-स्थिति उसके दुःख का कारण है। यदि कोई जागरूकता है तो यह कि उसकी निम्न-स्थिति के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। यह भाग्य का परिणाम
है। मान लिया जाए कि कोई शिकायत है, मान लिया जाए कि शिकायत के प्रति जागरूकता है तो हिन्दू सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध निम्न वर्गों द्वारा कोई विद्रोह नहीं किया जा सकता क्योंकि हिन्दू सामाजिक व्यवस्था जन-साधारण को हथियारों का उपयोग करने का अधिकार नहीं देती। सामाजिक व्यवस्था इस प्रकार के उपयोग में उल्टी दिशा लेते हैं। वे सबको बराबर का अवसर देते हैं। वे सबको ज्ञान प्राप्त करने की स्वतंत्रता देते हैं। वे हथियारों के इस्तेमाल करने की इजाजत देते हैं, और उपद्रवों तथा हिंसा को दबाने का कलंक अपने ऊपर लेते हैं। अवसर की स्वतंत्रता न देना, ज्ञान प्राप्त करने की स्वतंत्रता न देना, हथियार रखने का अधिकार न देना बहुत ही कू्रर अन्याय है। इसका परिणाम उसको एवं व्यक्ति। हिन्दू सामाजिक व्यवस्था इसके लिए शर्मिंदा नहीं है। तथापि इसमें दो उपलब्धियाँ हुई हैं। यद्यपि सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का यह बहुत ही बेशर्म तरीका है तथापि यह बहुत ही प्रभावकारी है। दूसरे इस तथ्य के बावजूद कि पुरुषत्व की हत्या करने के लिए बहुत ही अमानवीय तरीकों का प्रयोग किया जाता है, इससे हिन्दुओं को बहुत ही सहृदय होने की ख्याति मिली है।
हिन्दू सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इसकी विशेष लक्षण से सम्बन्धित तकनीक है। तकनीक दो तरह की हैः- पहली तकनीक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी राजा के कंधों पर डालना है। मनु ने यह स्पष्ट शब्दों में कहा है-
VIII -410 फ्राजा को व्यापारी वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति को व्यापार करने या ऋण देने या खेती करने और पशुओं की देखभाल करने का आदेश देना चाहिए_ और दास वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति को द्विजों की सेवा करने का आदेश देना चाहिए।य्
VIII -418 फ्राजा को बड़ी सजगता से व्यापारियों और मिस्त्रियों को अपने-अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य करना चाहिए_ क्योंकि जब ऐसे आदमी अपने कर्त्तव्यों से विमुख हो जाते हैं तों यह संसार उलझन में पड़ जाता है।य्
मनु ने इस संबंध में राजा के कर्त्तव्यों का विवरण ही नहीं किया है। उसने... निश्चित करने के लिए कि राजा हर समय स्थापित व्यवस्था को स्थापित करने और बनाए रखने