5. सामाजिक-व्यवस्था को बनाए रखना - Page 73

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

के लिए हर समय अपने कर्त्तव्य का पालन करेगा। इसलिए मनु ने दो अन्य प्रावधान किए हैं। एक प्रावधान यह है कि यदि राजा सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में असफल होता है तो यह एक अपराध होगा जिसके लिए साधारण आदमी की भाँति राजा पर मुकदमा चलाया जा सकेगा और उसे दंड दिया जा सकेगा। मनु के निम्न उद्धरणों से यह बात स्पष्ट हो जाती है-

VIII -335 फ्राजा न पिता, न गुरु, न मित्र, न माता, न पत्नी, न पुत्र, न घरेलू पुजारी को बिना सजा के छोड़ेगा, यदि वे अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह ठीक-ठीक नहीं करते।य्

VIII -336 फ्जहां नीच-जाति के आदमी पर एक रुपया जुर्माना होगा, वहीं राजा पर एक हजार रुपया जुर्माना होगा और वह जुर्माना पुजारी को देगा या उसे नदी में डालेगा, यह पवित्र नियम है।य्

मनु ने राजा के विरुद्ध उसके लापरवाह होने या सामाजिक व्यवस्था का विरोध करने पर दूसरा यह प्रावधान किया था कि ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों को उसके विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने का अधिकार होगा।

VIII -348 फ्द्विज हथियार उठा सकते हैं जब उनके कर्त्तव्यों में बलपूर्वक रुकावट डाली जाती है, और जब कुछ बुरे-समय में द्विजों पर महाविपदा पड़ी हो।य्

(पांडुलिपि में अधूरा छोड़ा गया - संपादक)