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IV

तन और मन की हालत अच्छी तभी हो सकती है जब सामाजिक वातावरण अच्छा हो। जिस समाज में कोई प्रतिबंध नहीं है, कोई रुकावट नहीं है, जिस समाज में व्यक्ति को न केवल निर्वाह के साधनों अपितु तंदुरुस्त रहने का भी अधिकार है, जहाँ किसी व्यक्ति को इतना परिश्रम नहीं करना पड़ता कि दूसरे पास सुख-साधनों की भरमार हो, जहाँ किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं और शक्तियों का विकास करने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाता है ताकि वे अपनों के साथ प्रतियोगिता न कर सकें, जहाँ परिश्रम करने वाले को इनाम मिलता है, जहाँ सभी के प्रति सद्भावना है।

(आगे का भाग हटा दिया गया है क्योंकि वह पढ़ने लायक नहीं था -

सम्पादक)

(़ऊपर का भाग डॉ. अम्बेडकर की हस्तलिपि में है और सभी भाग अलग-अलग

पृष्ठों पर लिखे गए हैं-संपादक)