8. राजनीतिक दमन की समस्या - Page 81

66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

पूना समझौता *

(1) प्रांतीय विधानमंडलों के सामान्य निर्वाचक-मंडल स्थानों में से पद दलित वर्गों के लिए स्थानों का आरक्षण इस प्रकार होगाः-

मद्रास-30_ बम्बई और सिंध-15_ पंजाब-8_ बिहार एवं उड़ीसा-18_ मध्य प्रांत-20_ आसाम-7_ संयुक्त प्रांत-20 कुल-148

ये आंकड़े प्रधानमंत्री के फैसले में घोषित प्रांतों की सभाओं की कुल संख्या पर आधारित हैं।

(2) इन स्थानों के लिए चुनाव निम्नलिखित प्रक्रिया के अध्याधीन संयुक्त निर्वाचन मंडलों द्वारा किया जाएगाः-

एक चुनाव क्षेत्र की सामान्य मतदाता सूची में पंजीकृत पद दलित वर्गों के सभी सदस्य एक इलेक्ट्रोरल कॉलेज बनाएंगे जो ऐसे प्रत्येक आरक्षित स्थान के लिए पद-दलित वर्गों के चार उम्मीदवारों का एकल मत के आधार पर निर्वाचन करेंगे, ऐसे प्राथमिक निर्वाचन में अधिकतम मत प्राप्त करने वाले चार व्यक्ति सामान्य निर्वाचन-मंडल द्वारा निर्वाचन के लिए उम्मीदवार होंगे।

(3) इसी प्रकार केंद्रीय विधानमंडल में पददलित वर्गों का प्रतिनिधित्व संयुक्त निर्वाचन - मंडलों के सिद्धांत के अनुसार किया जाएगा और आरक्षित स्थान प्रांतीय विधानमंडलों की भांति प्राथमिक निर्वाचन पद्धति द्वारा भरे जाएंगे जैसा कि ऊपर खंड 2 में प्रावधान किया गया है।

(4) केंद्रीय विधान-मंडलों में ब्रिटिश भारत के सामान्य मतदाताओं के लिए निर्धारित स्थानों में से 18 प्रतिशत स्थान पद्दलित वर्गों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।

(5) केंद्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों के लिए उम्मीदवारों का चुनाव करने की प्राथमिक निर्वाचन-पद्धति, जिसका ऊपर उल्लेख किया गया है, नीचे दिए गए खंड-6 के प्रावधान के अनुसार आपसी समझौते के आधार पर जल्दी समाप्त नहीं की जाती तो पहले दस वर्षों के पश्चात् समाप्त हो जाएगी।

(6) जैसा कि खंड 1 और खंड 5 में प्रावधान है, प्रांतीय और केंद्रीय विधान -मंडलों में स्थान आरक्षित करके पद्दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की पद्धति तब तक जारी रहेगी जब तक कि संबंधित समुदायों के बीच आपसी समझौते के आधार