9. अधिक बदतर क्या है-दासता या छुआछुत? - Page 83

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बदतर क्या है - गुलामी या अस्पृश्यता?

[ डॉ. अम्बेडकर ने इस पुस्तक माला के खंड 5 के अध्याय 3 और 8 अध्याय में ‘समस्या के मूल कारण’ - ‘समानांतर मामले’ शीर्षक के अंतर्गत गुलामी और अस्पृश्यता पर विचार किया है।

तथापि अब हमें एक पुस्तिका मिली है जिसमें कुछ पैराग्राफ हैं जिनको खंड 5 के अध्याय 3 और अध्याय 8 में स्थान नहीं मिला है।

यहाँ उद्वत सामग्री को एक साथ पढ़ने से तारतम्य बना रहता है और पाठ्य-सामग्री पूरी प्रतीत होती है।

सामग्री के सही होने में संदेह की भी कोई गुंजाइश नहीं रहती क्योंकि इस पुस्तिका का प्रकाशक श्री देवी दयाल 1943-47 में डॉ. अम्बेडकर के साथ रहा था। अध्याय के आरंभ में पुस्तिका में छपे शीर्षक की अनुलिपि इस बात का प्रमाण है कि यह अध्याय डॉ. अम्बेडकर ने लिखा है। फ्मानवता के विचारय् तक पुस्तिका के इससे पहले के पैराग्राफ अर्थात् पृष्ठ 1 से 11, खंड 5 में पृष्ठ 80 से 88 पर पहले ही छप चुके हैं। श्री देवी दयाल के लिए इस लेख को प्रकाशित करने का श्रेय दिल्ली के श्री भगवान दास को जाता है। - संपादक ]

भारत में गुलामी

दूसरे राष्ट्रों से श्रेष्ठ होने के जो दावे हिन्दू करते हैं उनमें से दो का उल्लेख नीचे किया गया है। उनका एक दावा यह है कि भारत में हिन्दुओं में दासता की प्रथा नहीं है और दूसरा दावा यह है कि छुआछूत निश्चित-रूप से दासता से बहुत कम हानिकारक है।

पहला बयान वास्तव में सच्चा नहीं है। दासता हिन्दुओं की एक बहुत पुरानी प्रथा है। मनु ने, जो कानून देने वाला है, यह बात स्वीकार की है और मनु के पदचिह्नों पर चलने वाले अन्य स्मृतिकारों ने इसे सविस्तार प्रतिपादित किया है और इसे व्यवस्थित किया है। दासता हिन्दुओं में कभी मात्र एक प्राचीन संस्था ही नहीं थी जो न केवल कुछ धुंधले विगत समय में थी। यह एक संस्था थी जो वर्ष 1843 तक पूरे भारत में निरंतर