9. अधिक बदतर क्या है-दासता या छुआछुत? - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

एक आम आदमी की भाषा में, जब एक व्यक्ति दूसरे की संपत्ति होता है तो उसे दास कहा जाता है। कम पढ़े व्यक्ति के लिए यह परिभाषा कुछ ज्यादा ही सारगर्भित है। इसे आगे स्पष्ट किए बिना वह इसका अर्थ पूरी तरह नहीं समझ पाएगा। संपत्ति का अर्थ कोई चीज है, इस शब्द से कुछ अधिकार अभिप्रेत हैं जो एक व्यक्ति के किसी चीज पर होते हैं जो उसकी संपत्ति है जैसे कि किसी वस्तु को अपने पास रखने का अधिकार, उसका उपभोग करने का अधिकार, उससे होने वाले लाभ का दावा करने का अधिकार, बिक्री के द्वारा स्थानांतरित करने का अधिकार, गिरवी रखने या पट्टठ्ठे पर देने और उसे नष्ट करने का अधिकार। अतः स्वामित्व का अर्थ संपत्ति का पूर्ण प्रभुत्व है। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो जब यह कहा जाता है कि दास मालिक की संपत्ति है तो इसका अर्थ यह होता है कि मालिक दास की इच्छा के विरुद्ध उससे कार्य ले सकता है, बिना उससे पूछे उसकी कमाई का लाभ प्राप्त कर सकता है। मालिक अपने दास की इच्छा जाने बिना उसे पट्टठ्ठे पर दे सकता है, उसे बेच सकता है या उसे गिरवी रख सकता है और शब्द के कानूनी अर्थ के अनुसार मालिक उसे जान से मार सकता है। कानून की निगाह में दास एक वस्तु की भाँति है जिसका मालिक अपनी इच्छा के अनुसार लेन-देन कर सकता है।

इस कानूनी परिभाषा के अनुसार, दासता अस्पृश्यता से बदतर प्रतीत होती है। एक दास को बेचा जा सकता है, गिरवी रखा जा सकता है अथवा पट्टठ्ठे पर दिया जा सकता है_ एक अछूत को बेचा नहीं जा सकता, उसे गिरवी नहीं रखा जा सकता अथवा पट्टठ्ठे पर नहीं दिया जा सकता। मालिक दास की हत्या करके भी दोषमुक्त हो सकता है_ लेकिन एक अछूत नहीं हो सकता। जिसके कारण उसकी मृत्यु होगी वह उसकी हत्या के लिए जिम्मेदार होगा। वास्तव में, दास की हत्या करके दंड से नहीं बचा जा सकता। कानून उसकी मृत्यु को घातक हत्या मानता है जैसा कि एक स्वतंत्र व्यक्ति की मृत्यु के मामले में होता है। लेकिन कानून के अनुसार दास की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि दास की स्थिति अछूत से बदतर थी।

दास की परिभाषा करने का एक अन्य तरीका भी है जो समान रूप से कानूनी और संक्षिप्त है यद्यपि सामान्य तरीका नहीं है। दास की परिभाषा करने का दूसरा तरीका इस प्रकार हैः- दास एक ऐसा मानव है जो कानून की निगाह में व्यक्ति नहीं है। दास की इस प्रकार परिभाषा करने से कुछ लोग सम्भवतः उलझन में पड़ सकते हैं। अतः यह बताना आवश्यक है कि कानून की दृष्टि में मनुष्य मानव शब्द के समान है। कानून में मानव हो सकते हैं किन्तु कानून उन्हें मनुष्य नहीं मानता। इसके विपरीत, कानून में मनुष्य हैं लेकिन वे मानव नहीं हैं। कानून व्यक्ति शब्द का जो अर्थ लगाता है उससे यही विलक्षण परिणाम निकलता है। कानून के प्रयोजनार्थ एक मनुष्य मानव अथवा गैर-मानव