9. अधिक बदतर क्या है-दासता या छुआछुत? - Page 86

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जैसी इकाई की तरह है जिसमें कानून के अनुसार अधिकार प्राप्त करने और कर्त्तव्यों का निर्वहन करने की सामर्थ्य होती है। कानून की दृष्टि में दास मनुष्य नहीं है यद्यपि वह मानव है वह कानून की दृष्टि में एक मूर्ति मनुष्य है यद्यपि एक निर्जीव वस्तु है। इस अंतर का कारण स्पष्ट हो जाएगा। एक दास एक मनुष्य नहीं है यद्यपि वह एक मानव है क्योंकि कानून उसे अधिकारों और कर्त्तव्यों की सामर्थ्य रखने वाली इकाई नहीं मानता। संक्षेप में, एक मूर्ति एक मनुष्य है यद्यपि वह एक मानव नहीं है क्योंकि कानून अधिकारों और कर्त्तव्यों के सामर्थ्य को मानता है, कानून सही या गलत है, यह अलग प्रश्न है। एक मनुष्य के रूप में मान्यता प्राप्त करना एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तथ्य है जिसके जबरदस्त परिणाम हो सकते हैं। इस विषय में क्या एक मनुष्य अधिकारों और स्वतंत्रताओं का हकदार होता है, वे अधिकार जो उसे उसकी मनुष्य रूप में मान्यता से प्राप्त होते हैं वे जीवन की तरह ही नहीं हैं अपितु जीवन की तरह महत्त्वपूर्ण हैं। उन अधि कारों में भौतिक वस्तुओं पर अधिकार, उनको प्राप्त करने, उनसे प्राप्त सुख एवं उनको बेचने के अधिकार आते हैं जिसे संपत्ति का अधिकार कहते हैं। इन भौतिक वस्तुओं के अधिकार से अधिक महत्त्वपूर्ण अन्य अधिकार हैं। प्रथम, अपना निजी अधिकार मारे न जाने अथवा विकृत न किए जाने, विधि की उचित-प्रक्रिया के बिना जख्मी न किए जाने का अधिकार अर्थात् जीवन का अधिकार, विधि की उचित प्रक्रिया के बिना बंदी न बनाए जाने का अधिकार अर्थात् स्वतंत्रता का अधिकार। दूसरे, प्रतिष्ठा का अधकिर - साथियों की नजर में उपहास न किए जाने अथवा गिर न जाने का अधिकार, ख्याति का अधिकार अर्थात् प्रतिष्ठा, जो दूसरे उसके लिए अनुभव करते हैं, पाने का अधिकार कम नहीं होंगे। तीसरे, शक्तियों और स्वतंत्रताओं के निर्बाध प्रयोग का अधिकार है। ख्1,

1. अधिकारों, शक्तियों और स्वतंत्रताओं में अंतर है जिसे आम आदमी के लिए अभिप्रेत पुस्तक में संभवतः

विशेष रूप से स्पष्ट करने की आवश्यकता है। जब एक व्यक्ति के पास अधिकार होना व्यर्थ है तब

उसका अर्थ यह होता है कि किसी दूसरे व्यक्ति का यह कर्त्तव्य है कि वह अपने कर्त्तव्य को पूरा

करके अधिकार को वास्तविक बनाए अथवा गलत काम करके या कुछ न करके उस अधिकार को

हानि न पहुँचाए।

अधिकार और स्वतंत्रता में अंतर है जो कई बार अधिकार समाप्त हो जाता है जब उसमें स्वतंत्रता को

समाहित करने के लिए उसका व्यापक अर्थ में प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कहा जाता

है कि एक व्यक्ति का अधिकार है, अर्थात् उसे अपनी इच्छानुसार कार्य करने की स्वतंत्रता है_ लेकिन

इसमें यह अर्थ नहीं आता कि एक व्यक्ति को कोई अधकिर नहीं है और उसे दूसरे की स्वतंत्रता में

हस्तक्षेप करने की स्वतंत्रता नहीं है। अधिकार और स्वतंत्रता के बीच अंतर इस प्रकार बयान किया जा

सकता है_ व्यक्ति के अधिकारों का संबंध चीजों से है जो अन्य लोगों को उसके लिए करनी चाहिए।

एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का संबंध उन चीजों से है जो उसे अपने लिए करनी चाहिएँ है।

स्वतंत्रताएँ ऐसे कार्य हैं जो एक व्यक्ति बिना कानूनी बाध्यताओं के कर सकता है। एक व्यक्ति

की कानूनी स्वतंत्रता का क्षेत्र गतिवधि का वह क्षेत्र है जिसके मामले में कानून कोई हस्तक्षेप नहीं

करता।