72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
हर व्यक्ति को बिना किसी हस्तक्षेप के सभी विधिसम्मत कार्य करने और एक व्यक्ति के रूप में उसे प्राप्त सभी विशेषाधिकारों का उपयोग करने का अधिकार है। इस प्रकार का बहुत ही स्पष्ट अधिकार अपनी आजीविका के लिए एक व्यक्ति द्वारा चुने गए व्यवसाय को बिना किसी हस्तक्षेप के चलाने का उसका अधिकार है। इसी शीर्षक के अंतर्गत राजनैतिक राजमार्ग, नदियों और सभी जनोपयोगी सेवाओं को निर्बाध-रूप से प्रयोग करने का हर व्यक्ति का अधिकार आता है। इसी के अंतर्गत हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह विधि तंत्र का, जिसकी स्थापना हर व्यक्ति की रक्षा करने के लिए की जाती है, उसको हानि पहुँचाने के लिए विद्वेषपूर्ण प्रयोग नहीं करेगा। तीसरे, धोखे से या बल प्रयोग द्वारा हानि से उन्मुक्ति का अधिकार - यह एक ऐसा अधिकार है जिसे किसी वस्तु के नुकसान पहुंचाने वाले स्थानान्तरण की धोखे से स्वीकृति पाने में जबरदस्ती प्रयोग नहीं किया जा सकता। चौथे, एक व्यक्ति के वे अधिकार जिनको सामूहिक तौर पर पारिवारिक अधिकार कहते हैं। इन पारिवारिक अधिकारों के अंतर्गत दाम्पत्य, पैतृक, अभिभावक और प्रभुत्व संबंधी अधिकार आते हैं। दाम्पत्य-अधिकार, दुनिया के विरुद्ध, पति का वह अधिकार है जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति बल प्रयोग द्वारा अथवा समझा-बुझाकर उसे उसकी पत्नी के साहचर्य से वंचित नहीं करेगा, यहाँ तक कि उससे अनुचित घनिष्ठ संबंध बिल्कुल स्थापित नहीं करेगा। इसी प्रकार का अधिकार पत्नी को भी दिया जा सकता है और अमरीका के कुछ भागों में इसे मान्यता प्राप्त है। पैतृक-अधिकार में बच्चों के समझदार होने तक बिना किसी हस्तक्षेप के उनकी अभिरक्षा और नियंत्रण तथा उनके श्रम की उपज का ध्यान रखना आते हैं। अभिभावक के अधिकार से माता-पिता का अभिभावक के लोभ के लिए नहीं अपितु बच्चे के लाभ के लिए अभिभावक के रूप में काम करने का अधिकार आता है जिनकी समझदारी की कमी को वह पूरा करता है और जिनकी आवश्यकताओं का वह ध्यान रखता है। प्रभुत्व-संबंधी अधिकार से आश्रित के श्रम का प्रयोग करने का अधिकार अभिप्रेत है। उसकी हत्या करने, उसको कम मूल्यवान बनाने के उद्देश्य से उसे जख्मी करने अथवा उसे बहला-फुसला कर भगा ले जाने से उस अधिकार का उल्लंघन होता है।
जहाँ तक कानून का संबंध है, एक व्यक्ति न होने के कारण एक दास को इनमें से कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। कानून की दृष्टि में अछूत एक व्यक्ति है। अतः यह नहीं कहा जा सकता कि उसको ऐसे कोई अधिकार प्राप्त नहीं हैं जो कानून एक व्यक्ति को देता है। उसे संपत्ति, जीवन, स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और परिवार के अधिकार तथा स्वतंत्र-रूप से अपनी स्वतंत्रता तथा अपनी शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है। दास की कोई जो भी परिभाषा करे, उसे संपत्ति के एक टुकड़े की संज्ञा दे या यह कहे कि वह एक व्यक्ति नहीं है, ऐसा प्रतीत होता है कि दस अछूत से बदत्तर था।