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यदि हम दास की कानूनी-स्थिति पर विचार करें तो उसकी ऐसी ही स्थिति थी। अब हम इस बात पर विचार करें कि रोम साम्राजय और संयुक्त राज्य में दास की वास्तव में क्या स्थिति थी। मैं श्री बैरो के कथन के सारांश को निम्नलिखित रूप में ले रहा हूँ- ख्1,
फ्अब तक घरेलू दासता के घृणास्पद पक्ष की रूपरेखा दी गई है। एक दूसरा पहलू भी है। साहित्य से पता चलता है कि कुटुम्ब का बड़ा होना एक सामान्य बात थी। वास्तव में यह अपवाद है। बड़ी संख्या में दास कर्मचारी होते थे ओर ऐसा आमतौर पर रोम में होता था। इटली आसैर निकटस्थ प्रांतों में दिखावे की कम आवश्यकता थी_ देहाती बंगलों के बहुत से कर्मचारी जमीन और इसकी उपज से संबंधित उत्पादक कार्य में व्यस्त थे। फोरमैन और दास के बीच पुरानी किस्म के संबंध बने रहे_ दास प्रायः साथ मिलकर काम करता था। यह सर्वविदित है कि प्लीनी अपने स्टाफ के प्रति बड़ा दयालु था। प्लीनी ने दंभी होने की भावना से यह नहीं कहा कि उसे अपने दासों के बीमार होने या उनकी मृत्यु होने पर दुःख होता है। उसकी यह स्वयं-सदाचारी होने तथा भावी पीढि़यों की नजर में दासों का पक्षधर बनने की अभिलाषा नहीं थी जो दासों के बीमार पड़ने और उनकी मृत्यु पर उसके द्वारा लिखे पत्र को पढ़ें कि प्लीनी का कुटुम्ब दासों का गणतंत्र था। दासों के साथ अपने व्यवहार का प्लीनी ने जो ब्यौरा दिया है उसे इतना सामान्य अथवा अवसरिक व्यवहार मान लिया जाता है कि प्रमाण के रूप में इसका कोई महत्त्व नहीं रह जाता। इस मनोवृत्ति का कोई कारण नहीं है।
दिखावे और वास्तविक साहित्यिक अभिरुचि दोनों की दृष्टि से धनी परिवार अपने घरों में साहित्य और कला में प्रशिक्षण-प्राप्त दास रखते थे। सेनेका के अनुसार कलवीसाइसेस सबिनस के ग्यारह दास थे जिनको होमर, हेसयोड और नौ कवियों के गीतों का जबानी कविता पाठ सिखाया गया था। एक अशिष्ट मित्र ने कहा, ‘किताबों के आवरण सस्ते होंगे।’ उत्तर में कहा गया, ‘नहीं, जो कुटुम्ब जानता है,मालिक जानता है’ लेकिन इस प्रकार के दुर्वचनों के अलावा दासों का शिक्षित होना एक अनिवार्यता रही होगी क्योंकि उस समय मुद्रण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी_ ..... व्यस्त वकील, कलाप्रेमी, कवि, दार्शनिक और साहित्यिक रुचि के शिक्षित लोगों को नक्लनवीसों, पाठकों और सचिवों की आवश्यकता थी। ऐसे लोग स्वाभाविक रूप से भाषाविद् भी थे_ एक पुस्तकालयाध्यक्ष ने, जिसकी 20 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई, अपने बारे में बढ़ा-चढ़ाकर कह रहा था कि वह ‘लैटिन में ईश्वर की कृपा से साहित्यकार’ था। पुस्तकालय-सहायक अधि कार थे_ पुस्तकालयाध्यक्ष सरकारी और गैर-सरकारी पुस्तकालयों में पाए जाते थे ......। साम्राज्य में आशुलिपि का आम प्रयोग होता था और दास नोटरी नियमित रूप से नियुक्त किए जाते थे ......।
1. रोम साम्राज्य में दासता, पृष्ठ 47-49।