74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
स्नेटोनियस ने एक विशेष पुस्तक में बहुत से स्वतंत्र व्यक्तियों, साहित्य शास्त्रियों और वैयाकरणों के नाम दिए गए हैं। वेरियस प्लॉक्स आसटस के पोतों का निजी शिक्षक था और उसकी मृत्यु होने पर एक प्रतिमा बनाकर उसका सार्वजनिक रूप से सम्मान किया गया। स्क्रीबोनियस एफ्रोडीसियस एक दास था तथा आबिलियस का शिष्य था और बाद में स्क्रीबेनिया द्वारा आजाद कर दिया गया था। हाईजिनस पेलेटाइन पुस्तकालय का पुस्तकालयाध्यक्ष था, जिसने उसके बाद उसी की दासता से मुक्त जुलियस मौडैस्टस नामक व्यक्ति पुस्तकालयाध्यक्ष बना। हमने सुना है कि एक दास दार्शनिक था जिसके दासता-मुक्त हुए इतिहासकार थे, जिसे अपने मालिक के दोस्तों के दासों और दासता-मुक्त किए हुए वास्तुविदों के साथ बहस करने के लिए प्रेरित किया गया_ शिलालेखों में दासता-मुक्त डॉक्टरों के नाम अक्सर मिलते हैं, जिनमें से कुछ विशेषज्ञ थे_ उनको बड़े घरों में दासों के रूप में प्रशिक्षित किया गया जैसा कि एक या दो उदाहरणों से विदित होता है_ दास्यमुक्ति के बाद वे ऊपर उठे और अपनी उच्च शुल्क के कारण बदनाम हो गए।
फ्समाज के कुछ वर्गों की माँग थी कि नर्तकियों, संगीतज्ञों, जुए के अ्यस्त्रों, विभिन्न प्रकार के कलाकारों, कुश्ती लड़ने या व्यायाम करने वालों के प्रशिक्षकों एवं समाचार संवाहकों को सामने आना चाहिए। ये सभी दास लोग थे जिन्हें ख्याति-प्राप्त अध्यापकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता था।य् ख्1,
आगस्टस का समय व्यापारिक और औद्योगिक विस्तार अवधि की शुरुआत था. ...। दासों को वास्तव में रोजगार पर (पहले कला और शिल्प में) रखा गया, किंतु व्यापार के अचानक बढ़ जाने से उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ गए जो अन्यथा अनावश्यक होते। रोम के लोग मुक्त-रूप और खुले-आम विभिन्न प्रकार के व्यापारिक और औद्योगिक धंधों में व्यस्त हो गए। फिर भी यहां तक कि एजेंट का महत्त्व बढ़ गया क्योंकि व्यापारिक गतिविधियों का काफी विस्तार हो गया और ऐसे एजेंट आवश्यक-तौर पर दास थे। .... इसका कारण यह है कि दासता के बंधन लचीले हैं। उन बंधनों को ढीला करके दासों को यह प्रोत्साहन दिया जा सकता था कि वे धनोपार्जन और स्वतंत्रता की आशा में उन्हें काम दिया जा सकता था, तथा ये बंधन इतने मजबूत हो सकते थे कि वे मालिक को यह गारंटी भी दे सकते थे कि उनके दास के दुराचरण के कारण उसे कोई नुकसान नहीं होगा। दास और मालिक के बीच व्यापार के ठेकों में तीसरे व्यक्ति का होना आम बात थी, और काम इस प्रकार होता था कि निस्संदेह लाभ बहुत होता था। ....दासों को भूमि लगान पर दी जाती थी जैसा कि पहले बताया जा चुका है
1. रोग साम्राज्य में दासता, पृष्ठ 63।