9. अधिक बदतर क्या है-दासता या छुआछुत? - Page 93

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

काम करती थीं। 1839 में बर्किंघम ने उन्हें एथेन्स, जार्जिया में गोरी लड़कियों के साथ बिना किसी आपत्ति के काम करते हुए देखा।

दक्षिण के नीग्रो कारीगर, दास ओर स्वतंत्र लोग उत्तर के अपने बंधुओं से अच्छे थे। फिलाडेल्फिया में 1856, 1637 नीग्रो कारीगर थे जिनमें से दो तिहाई से कम प्रतिकूल पूर्वाग्रह के कारण अपने शिल्पों का प्रयोग कर सकते थे। आयरलैंड के लोगों का, जिनका उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ से ही अमरीका मेकं आगमन आरंभ हो गया था, नीग्रो दासता की भाँति ही लगभग उन्हीं प्रयोजनों के लिए उत्तर में प्रयोग किया जा रहा था। उनके पक्ष में तर्क देते हुए कहा गया कि आयरलैंड का एक कैथोलिक जिस स्थिति में होता है उससे ऊपर उठने का कभी प्रयास नहीं करता जबकि नीग्रो सफल होने का प्रयास करता है। जब काले दासों का व्यापार हो रहा था तो क्या वृद्ध प्यूटिन ओलीवर क्रामवेल ने आयरलैंड के उन सभी कैथोलिकों की बारबादोस में बिक्री नहीं कर दी थी जो द्रोथेड़ा नरसंहार में नहीं मारे गए। न्यूयॉर्क और पैनसिल्वेनिया में स्वतंत्र और भगोड़े नीग्रो लोगों की इन लोगों के साथ निरंतर लड़ाई होती रहती थी और इस शत्रुता ने न्यूयॉर्क के उपद्रवों में बहुत ही प्रचंड रूप ले लिया था। इन हाइबर्नियन लोगों का बोझा ढोने और मजदूरी के अन्य कार्यों पर नियंत्रण था और वे नीग्रो लोगों के हर प्रस्ताव को अमरीका पर अपनी थोड़ी-सी पकड़ और आजीविका के एक साधनों के लिए खतरा समझते थे।

रोम के दासों और अमरीका के नीग्रो दासों की असल में यह हालत थी। क्या भारत के अछूतों की कोई ऐसी बात है जिसकी रोम के दासों और अमरीका के नीग्रो दासों से तुलना की जा सके? अछूतों और रोम-साम्राज्य के अंतर्गत दासों की हालत में तुलना करने के लिए एक ही अवधि ली जाए तो अनुचित नहीं होगा। लेकिन रोम-साम्राज्य में दासों की हालत की तुलना आज के अछूतों की हालत से की जाए तो मुझे आपत्ति नहीं होगी। यह तुलना एक ओर घटिया और दूसरी ओर बढि़या से बढि़या के बीच होगी क्योंकि आज का समय अछूतों के लिए स्वर्णकाल माना जाता है। अछूतों की वास्तविक दशा की तुलना दासों की वास्तविक दशा से कैसे कर सकते हैं? रोम के दासों की तरह कितने अछूत पुस्तकालयाध्यक्ष, साहित्यिक सहायक, आशुलिपिक जैसे व्यवसायों में लगे हैं? रोम में दासों की भाँति भारत में कितने अछूत वक्ता, व्याकरण-वेत्ता, दार्शनिक, निजी-शिक्षक, डॉक्टर और कलाकार हैं? रोम के दासों की तरह कितने अछूत व्यापार, वाणिज्य या कारखानों में लगे हैं? अछूत की स्थिति की तुलना नीग्रो की उस समय की स्थिति से करने पर, जिस समय वह दास था, नहीं कहा जा सकता कि अछूतों की हालत उनकी हालत से बेहतर है। क्या अछूतों के शिल्पकार होने का कोई उदाहरण है? क्या किसी अछूत ने कभी ऐसा कोई विद्यालय खोला है जहाँ ब्राह्मण बच्चे शिक्षा प्राप्त करने हेतु आकर उसके चरणों में बैठे हैं? ऐसी चीज सोची भी क्यों नहीं जा सकती?