9. अधिक बदतर क्या है-दासता या छुआछुत? - Page 98

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के बीच विवाह की छूट, एवं सूदखोरी की वैधता से संबंधित बारह प्रश्नों के उत्तरों पर विचार करना था। सभा की घोषणाओं से नेपोलियन इतना प्रसन्न हुआ कि उसने इन घोषणाओं को विधानसभा में कानूनी आदेशों का रूप देने के लिए जेरूसलम की प्राचीन महासभा की तरह यहूदियों की एक महासभा बुलाई। यहूदियों की यह महासभा जिसमें फ्रांस, जर्मनी, हॉलैंड और इटली के प्रतिनिधि थे, 9 फरवरी 1807 में, स्टेसबर्ग के राबी सिन्हेम की अध्यक्षता में समाप्त हुई, और उसने एक प्रकार का अधिकार-पत्र अपनाया जिसमें यहूदियों को प्रेरित किया गया कि वे फ्रांस को अपनी पितृ-भूमि समझें, इसके नागरिकों को अपना भाई समझें और उसकी भाषा बोलें, एवं इस अधिकार-पत्र में इस बात पर भी बल दिया गया कि यहूदियों और ईसाइयों के बीच विवाह होने दिए जाएँ, इसके साथ ही यह घोषणा भी की गई कि यहूदी धर्म इनकी अनुमति नहीं दे सकता।य् इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यहूदियों ने यहूदियों और गैर-यहूदियों के बीच विवाह की इजाजत नहीं दी। वे केवल उन्हें बर्दाश्त करने के लिए सहमत हुए। दूसरे उदाहरण का संबंध इस घटना से है जो 1795 में बटाविया गणतंत्र की स्थापना होने पर घटित हुई। यहूदी समुदाय के अधिक ताकतवर सदस्यों ने दबाव डाला कि उन्हें जिन कठिनाइयों में काम करना पड़ता है उन्हें दूर किया जाए। परन्तु यह बड़ी विचित्र बात है कि प्रगतिशील यहूदियों द्वारा नागरिकता के पूरे अधिकारों की माँग का एम्स्टरडम समुदाय के नेताओं द्वारा पहले विरोध किया गया, उन्हें डर था कि नागरिक समानता यहूदी धर्म के कट्टठ्ठरपन के प्रतिकूल होगा और उन्होंने घोषणा की उनके धर्म के लोगों ने अपने धार्मिक विश्वास को मानते हुए अपने नागरिक अधिकारों का त्याग कर दिया था। इससे पता चलता है कि यहूदियों ने समाज के सदस्य बनकर रहने की बजाए, अजनबी बनकर रहना बेहतर समझा। ‘अपरिवर्तनीय लोग’ होने के कारण उन्हें अलग रखा गया और सजा दी गई। लेकिन अछूतों के मामले में ऐसी बात नहीं है एक भिन्न दृष्टि से वे भी अपरिवर्तनीय लोग होने के कारण उन्हें अलग रखा गया और उन्हें सजा दी गई। लेकिन अछूतों के मामले में ऐसी बात नहीं है। एक भिन्न दृष्टि से वे भी ‘अपरिवर्तनीय लोग’ हैं जो अन्य लोगों से अलग हैं। लेकिन वे अपनी इच्छा से अलग नहीं हुए हैं। उनको दंड इसलिए नहीं दिया गया कि वे मिल-जुलकर रहना नहीं चाहते। उनको दंड इसलिए दिया गया कि वे मिल-जुल कर रहना चाहते हैं।

छुआछूत दासता से बदतर है क्योंकि दास का समाज में एक व्यक्तित्व है यह बात अच्छी तरह स्पष्ट कर दी गई है। लेकिन छुआछूत के दासता से बदतर होने का केवल यही एक कारण नहीं है। इसके अन्य कारण भी हैं जो प्रत्यक्ष तो नहीं हैं लेकिन फिर भी वास्तविक हैं।

इनमें से जो सबसे कम प्रत्यक्ष कारण है उनका उल्लेख पहले किया जा सकता है। यदि दासता ने दास को किसी तरह की आजादी नहीं दी, तो उसके मालिक का यह