82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
ने जो भारत में ग्राम समुदायों को व्यापक रुप से तिरस्कृत किया है मैं उनके विचार से सहमत नहीं हूँ। मेरा उनके विचार से भी पूरी तरह मतभेद है कि भारत में लोकतंत्र भारतीय जमीन पर केवल एक ऊपरी ड्रेसिंग है.....
इससे पहले कि मैं प्रारुप संविधान पर अपनी टिप्पणी व्यक्त करुँ, प्रारुपण समिति के काम पर और उसके सदस्यों की भूमिका के बारे में मेरे माननीय मित्र श्री टी. टी. कृष्णामाचारी द्वारा व्यक्त कुछ विचारों की दृष्टि से अपनी स्थिति स्पष्ट करना अपने स्वयं के और सदन के प्रति मेरा दायित्व है। समिति के सदस्य के नाते, खराब स्वास्थ्य के बावजूद मैने प्रारुप संविधान के प्रकाशन से पूर्व उसकी बैठकों में काफी सक्रिय भाग लिया था और जब मैं बैठक में भाग नहीं ले सका तब भी मैंने अपने साथियों के विचारार्थ नोट्स और सुझाव भेजे। प्रारुप संविधान के बाद स्वास्थ्य की वजह से मैं उसके विचार-विमर्श में भाग नहीं ले सका और मैं प्रारुप संविधान के उपान्तरों विषयक सुझावों के श्रेय का दावा नहीं कर सकता.....
5 ... प्रारुप संविधान के संक्षिप्त सर्वेक्षण से सदस्य इस बात से आश्वस्त हो गए होंगे कि यह लोकतांत्रिक शासन के ठोस सिद्धांतों पर आधारित है और इसके अंदर वे सब तत्व हैं जो प्रगति और प्रसार के लिए आवश्यक हैं और यह विश्व के सबसे अधिक उन्नत संविधान के अनुरुप है। यह ध्यान रखना चाहिए कि संविधान आखिर वही होता है जो हम उसमें से लेते हैं। इसका सर्वोत्तम दृष्टांत संयुक्त राज्य के संविधान में मिलता है। जबकि इसे विभिन्न राज्यों द्वारा अंतिम रुप से अंगीकार किया गया था तो उसमें उत्साह की कमी थी। लेकिन फिर भी यह समय की कसौटी पर खरा उतरा है और शेष लोकतांत्रिक विश्व इसे एक आदर्श संविधान मानता है।
ख्6, पं. जे. गोविंद मालवीयः श्रीमन, इससे पहले कि मैं कुछ और कहूँ मुझे आपको और प्रारुपण समिति को और उसके बहुमुखी प्रतिभावान अध्यक्ष, हमारे मित्र डॉ. अम्बेडकर को उत्तम कार्य के लिए अपनी सौहार्दपूर्ण बधाई देनी चाहिए जो उन्होंने इस प्रारुपण संविधान को हमें देने में किया है। उनके सामने यह एक विकट समस्या थी जिसे उन्होंने अत्यंत उत्तम ढंग से सुलझाया है। प्रारुप संविधान में ऐसी बहुत सी बातें हो सकती हैं जिन्हें कोई भी किंचित भिन्न रुप में चाह सकता था, किन्तु यह तो हर चीज के बारे में हो सकता है जिसका कहीं भी निर्माण किया जाए......
ख्7, श्री आर. शंकर (ट्रेवनकोर)ः श्रीमन, सबसे पहले मुझे प्रारुप संविधान के सभी निर्माताओं को बधाई देनी चाहिए कि उन्होंने अपना काम इतने कौशलपूर्ण ढंग से किया है मैं विशेष रुप से इसके लिए डॉ. अम्बेडकर जी को बधाई देना चाहूँगा कि उन्होंने
संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 7, 8 नवंबर, 1948 पृष्ठ 34-338। 5 सी.ए.डी. खंड 7, 8 नवंबर 1948, पृष्ठ 338 ।
6 वही, पृष्ठ 340 ।
7 वही, पृष्ठ 340 ।