84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
के लिए छोड़ दिए गए थे। बहरहाल, सदन उन विषयों को क्रमबद्ध तरीके से रखने में उनके परिश्रम के लिए धन्यवाद देता है...
ख्4, श्री विश्वंभर दयाल त्रिपाठी (संयुक्त प्रांत-साधारण)ः श्रीमन, मैं सीधे विषय-वस्तु पर आता हूँ, प्रायः सभी वक्ताओं ने प्रारुपण समिति के सदस्यों और उसके अध्यक्ष के परिश्रम से संविधान के निर्माण में और उसकी गुणता पर किए गए परिश्रम के लिए बधाई देने की औपचारिकता का निर्वाह किया है। मैं उस औपचारिकता में नहीं पडूँगा। निःसंदेह, यह सही है कि उन्होंने बड़ा श्रम किया है और हमारे समक्ष उन सिद्धांतों पर एक संविधान का पूर्ण चित्र रखा है जो हमने संविधान सभा में निर्धारित किए थे। मुझे यह भी ज्ञात है कि प्रारुपण संविधान में गुणवत्ता बहुत अधिक मात्रा में है। निस्संदेह उन्होंने विभिन्न देशों क संविधानों का गहन अध्ययन किया है और उनमें से चुनाव करने का एवं उन संविधानों का अपने देश की जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास किया है। इस प्रारुप की यही सबसे बड़ी गुणवत्ता है। एक शब्द में, यह एक पारम्परिक संविधान है....।
ख्5, श्री एस.वी.कृष्णमूर्ति राव (मैसूर)ः उपसभापति महोदय, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मुझे प्रारुप संविधान के बारे में बोलने का मौका दिया। प्रारुपण समिति और उसके अध्यक्ष के प्रति मैं भी विभिन्न वक्ताओं की भांति अपने प्रशंसा सुमन अर्पित करता हूँ।
इस प्रारुप संविधान में विश्व के एकात्मक और संघात्मक दोनों प्रकार के विभिन्न लोकतांत्रिक संविधानों की श्रेष्ठ चीजों को ग्रहण करने का प्रयत्न किया गया है। निस्संदेह, कोई भी संविधान सर्वथा परिपूर्ण नहीं हो सकता और हमारे संविधान के अंतिम रूप से सदन से पारित किए जाने के पूर्व इसमें कुछ परिवर्तन करने होंगे.......।
ऽऽऽऽऽ
ख्6, श्री एन. माधव राव (उड़ीसा-रियासत)ः उपसभापति महोदय, मैं इस चर्चा में भाग लेना चाहता था। किन्तु प्रारुप संविधान के उपबंधों पर ही नहीं बल्कि उस रीति पर भी जिसमें प्रारुपण समिति ने अपना काम किया है अनेक टिप्पणियां की गई हैं। समिति के करने और न करने के कथिन दोषों की भी आलोचना की गई है। श्री अल्लादी कृष्ण स्वामी अय्यर जो बोले थे, और श्री सादुल्ला ने जो समिति की ओर से बाद में बोलेंगे, इस आलोचना को जन्म देने वाली गलतफहमियों का निराकरण कर दिया है और करेंगे। मैंने यह महसूस किया कि समिति के सदस्य के नाते मुझे भी इन गलतफहमियों को दूर
4 वही, पृष्ठ 369 ।
5 संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 7, 8 नवंबर, 1948, पृष्ठ 382 । 6 वही, पृष्ठ 384-85 ।