भारत का राजपत्र असाधरण प्राधिकार से प्रकाशित नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, पफरवरी 26, 1948 भारत की संविधान सभा - Page 109

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कर देना चाहिए कि सभी सदस्य समिति की सब बैठकों में उपस्थित नहीं रहे। किन्तु जिस भी बैठक में कोई निर्णय लिया गया उसमें गणपूर्ति थी और निर्णय या तो सर्वसम्मति से या उपस्थित सदस्यों के बहुमत से किए गए थे।

प्रारुप तैयार करने में प्रारुपण समिति से निःसंदेह संविधान सभा द्वारा अथवा संविधान सभा द्वारा नियुक्त समितियों द्वारा नियुक्त समितियों द्वारा किए गए निर्ण्ायों का अनुसरण करना प्रत्याशित था। प्रारुपण समिति ने यथासंभव ऐसा ही करने का प्रयास किया है। फिर भी कुछ विषय ऐसे थे जिनकी बाबत प्रारुपण समिति ने कुछ परिवर्तन सुझाना आवश्यक समझा। ये सब परिवर्तन प्रारुपों में या तो सुसंगत भागों को अधोरेखांकित करके या पार्श्वरेखांकित करके इंगित कर दिए हैं प्रारुपण समिति ने हर ऐसे परिवर्तन के लिए कारण बताते हुए टिप्पणी देने का भी ध्यान रखा है। फिर भी मेरे विचार में, विषय की महत्ता की दृष्टि से, कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर मैं आपका और संविधान सभा का ध्यान

खीचना चाहता हूँॅ।

2. उद्देशिकाः जनवरी, 1947 में संविधानसभा द्वारा अंगीकृत उद्देश्य-संकल्प में घोषणा की गई है कि भारत एक प्रभुत्व संपन्न गणराज्य होगा। प्रारुपण समिति ने ‘‘प्रभुत्व-संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य’’ पद अपनाया है क्योंकि स्वाधीनता शब्द प्रायः प्रभुतासंपन्न में निहित रहता है इसलिए ‘‘स्वाधीन’’ शब्द जोड़कर कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। इस लोकतंत्रात्मक गणराज्य और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में संबंध के प्रश्न पर बाद में फैसला किया जाएगा।

समिति ने उद्देशिका में बंधुता का एक खंड डाला है, हालांकि यह उद्देश्य संकल्प में नहीं है। समिति ने महसूस किया कि भारत में बन्धुत्व, सौहार्द और सद्भाव की जरुरत आज से ज्यादा कभी नहीं रही और यह कि नये संविधान के इस विशिष्ट लक्ष्य पर उद्देशिका में विशेष उल्लेख द्वारा जोर दिया जाना चाहिए।

अन्य के संबंध में समिति ने उद्देशिका में उद्देश्य संकल्प की भावना एवं यथासंभव उसकी भाषा को समाविष्ट करने की कोशिश की है।